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बेहतर मुनाफे के लिए Fixed Income वाले प्रोडक्ट्स में कीजिए डाइवर्सिफायड निवेश

आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि निश्चित इनकम वाले प्रोडक्ट्स में भी दो प्रोडक्ट्स एक जैसे नहीं होते हैं। वे अलग-अलग होते हैं और अलग-अलग मकसद को पूरा करते हैं।

हम जब भी डाइवर्सिफिकेशन की बात करते हैं तो अधिकतर मौकों पर हमारे दिमाग में शेयर बाजार में निवेश की बात आती है। इंवेस्टमेंट के इस बुनियादी सिद्धांत से जुड़ी अधिकतर बातचीत इक्विटी से जुड़ी होती है। वहीं, फिक्स्ड इनकम को लेकर कोई खास बातचीत नहीं होती है। वहीं, बैंलेंस और स्थिरता के लिए शेयर बाजार की तरह ही गारंटीड रिटर्न वाले इंवेस्टमेंट प्रोडक्ट में डाइवर्सिफिकेशन (विविधीकरण) की दरकार होती है।

गारंटीड रिटर्न वाले प्रोडक्ट्स में डाइवर्सिफिकेशन की जरूरत

गारंटीड इनकम या निश्चित इनकम वाले प्रोडक्ट्स में डाइवर्सिफिकेशन के तरीके के बारे में समझने से पहले आइए ये जानते हैं कि ऐसा करना क्यों जरूरी है? इसकी वजह ये है कि निश्चित इनकम वाले प्रोडक्ट्स में भी दो प्रोडक्ट्स एक जैसे नहीं होते हैं। वे अलग-अलग होते हैं और अलग-अलग मकसद को पूरा करते हैं।

उदाहरण के लिए टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपोजिट (FD) आपकी टैक्स देनदारी को कम करते हैं। दूसरी ओर, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) से आपको बच्चों की पढ़ाई, शादी और रिटायरमेंट जैसे वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है। ऐसे में आपको अलग-अलग लक्ष्यों को हासिल करने और डाइवर्सिफिकेशन के लिए गारंटीड रिटर्न वाले अलग-अलग प्रोडक्ट्स में इंवेस्ट करना चाहिए।

आप कैसे कर सकते हैं डाइवर्सिफाई?

इमरजेंसी समय बता कर नहीं आती है और तैयारी नहीं होने पर आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों के लिए आपके पास इमरजेंसी फंड अनिवार्य तौर पर होना चाहिए। कोविड-19 जैसी महामारी ने इस फंड की जरूरत को कई गुना तक बढ़ा दिया है। किसी भी मुश्किल स्थिति के लिए आप FD में निवेश के जरिए इमरजेंसी फंड बना सकते हैं। पिछले कुछ समय में एफडी रेट्स में कमी आई है। ऐसे में इमरजेंसी फंड बनाते समय आपको रिटर्न के बारे में सबसे आखिर में सोचना चाहिए।

FD सेफ्टी, लिक्विडिटी और रिटर्न (SLR) सिद्धांत के लिहाज से बिल्कुल मुफीद बैठते हैं। आप मेच्योरिटी से पहले भी मामूली जुर्माना देकर अपना फंड निकाल सकते हैं। FD शुरू करने के लिए आप बैंक जाकर एफडी फॉर्म भरकर दे सकते हैं। इतना ही नहीं आप इंटरनेट बैंकिंग के जरिए भी एफडी कर सकते हैं।

बच्चों की उच्च शिक्षा/ शादी और अपने रिटायरमेंट के लिए प्रोविडेंट फंड में निवेश

आप अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, उनकी शादी और अपने रिटायरमेंट के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर दांव लगा सकते हैं। यह एक सॉवरेन स्कीम है, जिसे EEE (एग्जेम्ट, एग्जेम्ट, एग्जेम्ट) का दर्जा प्राप्त है। इसमें निवेश की गई राशि, प्राप्त ब्याज और मेच्योरिटी के समय मिलने वाली रकम पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है।

सरकार हर तिमाही से पहले पीपीएफ के ब्याज दर को लेकर फैसला करती है। जून, 2022 में समाप्त होने वाली तिमाही के लिए पीपीएफ पर ब्याज की दर 7।1 फीसदी पर है। पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। लंबी अवधि के लॉक-इन पीरियड से आपके पैसे को वृद्धि के लिए अधिक वक्त मिल जाता है और यहीं पर कम्पाउंडिंग का रोल अहम हो जाता है। आप कुछ शर्तों के अनुपालन के साथ आंशिक निकासी कर सकते हैं।

टैक्स की देनदारी कम करने के लिए टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपोजिट

टैक्स-सेविंग एफडी में निवेश पर आपको इनकम टैक्स 1961 के अनुसार सेक्शन 80C के तहत टैक्स में छूट मिलती है। 80C के तहत एक वित्त वर्ष में 1।5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स में छूट मिलती है। टैक्स-सेविंग एफडी का लॉक-इन पीरियड पांच साल का होता है और रेग्युलर एफडी के विपरीत इसे आप मेच्योरिटी से पहले नहीं तोड़ सकते हैं।

एफडी की पूरी अवधि के दौरान ब्याज की दर तय होती है। आप कम-से-कम 1,000 रुपये निवेश कर सकते हैं। डिपोजिट की अवधि पूरी होने पर मेच्योरिटी की राशि (मूलधन+ब्याज) आपके अकाउंट में क्रेडिट हो जाती है।

महंगाई से पार पाने में मदद करता है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

सोना (Gold) महंगाई से पार पाने के लिए हमेशा से एक प्रभावी इंस्ट्रुमेंट रहा है। हालांकि, उन्हें फिजिकल फॉर्म में रखने के कई तरह के नुकसान हैं। इसे सुरक्षित तरीके से रखने की टेंशन होती है दूसरी तरह शुद्धता को लेकर भी एक तरह का डर होता है। हालांकि, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGBs) से इस तरह की चिंताएं दूर हो जाती हैं।

एसजीबी पर आपको 2.5 फीसद सालाना का ब्याज भी मिलता है। इसमें इंवेस्ट करने वालों को छमाही आधार पर ब्याज मिलता है। इसमें मेच्योरिटी की अवधि आठ साल होती है लेकिन आप पांच साल बाद एग्जिट कर सकते हैं। कुल-मिलाकर इसे खरीदना फिजिकल गोल्ड से सस्ता पड़ता है।

निष्कर्ष

अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स में डाइवर्सिफिकेशन से आपको एसेट क्लास का पूरा फायदा उठाने में मदद मिलती है। इससे आपके अधिकतर लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाते हैं। आपको निवेश के लिए शुभकामनाएं। 

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