स्वास्थ्य

वजन कम होता हैं तो , पैरों में दर्द और सूजन की समस्या

अगर आपको लगता है कि आपकी कमजोरी-थकान और पैरों में दर्द या कम होता वजन आपके सही आहार न लेने से हो रहा है तो आपके लिए ये खबर बहुत काम की है

 यहां आपको उन 6 बीमारियों के बारे में बताएंगे जो ऑटोइम्यून डिजीज (Autoimmune Diseases) का कारण हैं।

ऑटोइम्यून बीमारियां का अंदाजा बहुत जल्दी नहीं लग पाता, लेकिन बॉडी इसके साइन देती रहती है। बस इस साइन को नजरअंदाज करना ही बीमारी की गंभीरता का कारण बनता है। हालांकि, आटोइम्यून डिजीज पूरी तरह से सही नहीं होती, लेकिन उन्हें कंट्रोल कर हेल्दी लाइफ आसानी से जिया जा सकता है, बस इसका पता सही समय पर चलना चाहिए। ऑटोइम्यून बीमारियां पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा होती हैं। तो चलिए जानें कि ऑटो इम्युन डिजीज कौन-कौन सी होती हैं और इसके लक्षण क्या हैं।

ऑटोइम्यून डिजीज सीधे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर ही हमला करती हैं। इससे शरीर में बीमारियों से बचाने के लिए एंटीबॉडी का निर्माण नहीं हो पाता। ऑटोइम्यून डिजीज शरीर की कोशिकाओं नुकसान पहुंचाने लगती हैं। ऑटोइम्यून डिजीज दो तरह के होते हैं। एक में केवल एक ही अंग प्रभावित होता है, बल्कि दूसरे में शरीर के कई पार्ट्स पर इफेक्ट पड़ता है।

ऑटोइम्यून बीमारियों के प्रकार (Types of Autoimmune Diseases) इस डिजीज में प्रतिरक्षा प्रणाली हेल्दी टिश्यू और हानिकारक एंटीजन के बीच अंतर नहीं कर पाता और इससे शरीर के हेल्दी टिश्यू को भी नुकसान पहुंचने लगता है। और इसे ही ऑटोइम्यून डिजीज कहते हैं।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis) मल्टीपल स्क्लेरोसिस में सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचता है। इससे मस्तिष्क, रीढ की हड्डी और ऑप्टिक नर्व को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। ये एक गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी कहलाती है। इस बीमारी से आंखों की नसों पर भी प्रभाव पड़ता है।
मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण ⦁ चलने फिरने में असमर्थता। ⦁ बेतहाशा कमजोरी होना। ⦁ बुखार आते रहना। ⦁ आंखों में कई तरह की समस्याएं। ⦁ सोचने-समसझने में दिक्कत होने लगना। ⦁ डिप्रेशन होना।  सोरियाटिक अर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis) सोरियाटिक अर्थराइटिस उनमें ही पाया जाता है जिन्हें पहले से सोरायसिस की दिक्कत रही हो। जोड़ों में सूजन और अकड़न इसके लक्षण हैं। सोरियाटिक अर्थराइटिस के रोगियों की उंगलियां, पंजे, घुटने और रीढ़ में सूजन भी आ जाती है। इससे दर्द होता है और सही समय पर जांच एवं उपचार न होने से स्थिति गंभीर हो सकती है।
सोरायटिक अर्थराइटिस के लक्षण ⦁ हाथ और पैर की उंगलियों में सूजन। ⦁ मांसपेशियों में तनाव और दर्द। ⦁ स्किन में ड्राइनेस और जोड़ों में दर्द। ⦁ आंखों में लालिमा आना और चुभन के साथ दर्द। ⦁ बहुत ज्यादा थकान होना।
टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) टाइप 1 डायबिटीज में इम्यून सिस्टम, शरीर में इंसुलिन बनाने वाले मेन पार्ट पैनक्रियाज को ही इफेक्ट करता है। इसके सारे सेल्स ये नष्ट कर देता है इससे शरीर में शुगर पच नहीं पाता और आप टाइप 1 डायबिटीज हो जाता है।
टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण ⦁ बार-बार यूरिन आना। ⦁ बहुत ज्यादा प्यास लगना। ⦁ शरीर में बार-बार पानी की कमी होना। ⦁ दिल की धड़कन असमान्य हो जाना। ⦁ हाथों में सुन्नाहट या झुनझुनी अथवा कंपकंपी होना। ⦁ कमजोरी और थकान महसूस करना।
रूमेटाइड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) रूमेटाइड अर्थराइटिस यानी गठिया भी एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इस बीमारी में भी प्रतिरक्षा तंत्र गलती से कोशिकाओं पर हमला कर देता है। शरीर के हर जोड़ में ये समस्या होने लगती है। यही नहीं इस बीमारी में आंखों, लंग्स, दिल और खून की धमनियों और त्वचा पर भी बुरा असर पड़ता है।
रूमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षण ⦁ जोड़ों में अकड़न और तेज दर्द। ⦁ कमजोरी का अहसास होना। ⦁ कई बार बुखार भी होते रहना। ⦁ मुहं और आंखों में हद से ज्यादा सूखापन। ⦁ शरीर में जगह-जगह जोड़ों के आसपास गांठ बनना।
इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (Inflammatory Bowel Disease) इंफ्लेमेटरी बाउल में आपके पेट में लंबे समय तक सूजन बनी रह सकती है। इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज में अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative colitis) और क्रोहन डिजीज शामिल हैं।  इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज के लक्षण ⦁ पेट में सूजन आना। ⦁ पेट में गंभीर दर्द बने रहना। ⦁ कमजोरी महसूस होना। ⦁ वजन घटते जाना। ⦁ दस्त की समस्या रहना।
सीलिएक रोग (Celiac Disease) सीलिएक डिजीज में आपको ग्लूटन नमक प्रोटीन से एलर्जी होती है। इस बीमारी में ग्लूटन वाली चीजों के सेवन से मरीज को कई समस्याएं हो सकती हैं। ग्लूटन गेंहू, जौ, सूजी, जई जैसे खाद्य पदार्थों में पाया जाता है।
सीलिएक डिजीज के लक्षण ⦁ लगातार वजन कम होना। ⦁ कब्ज और दस्त की समस्या। ⦁ पेट में दर्द और अन्य समस्याएं। ⦁ थकान और कमजोरी। 7. एडिसन रोग (Addison’s Disease) एडिसन रोग में एड्रिनल ग्रंथियां पर्याप्त मात्रा में विशेष हार्मोन्‍स नहीं बना पातीं। इसे हाइपोकोर्टिसोलिज्म भी कहा जाता है। एक दीर्घकालिक अंतःस्रावी विकार यानि एंडोक्राइन डिसऑर्डर है। एडिसन रोग के लक्षण ⦁ अत्यधिक कमजोरी। ⦁ तनाव और थकान। ⦁ वजन कम होना। ⦁ लो ब्लड शुगर इन बीमारियों का इलाज अगर चलता रहे तो समस्या बढ़ने नहीं पाती है और कंट्रोल में रखा जा सकता है।

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