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दांतों की सफाई न करने से हृदय-मनोरोगों का भी हो सकता है खतरा

शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए मौखिक स्वच्छता पर ध्यान देना विशेष आवश्यक माना जाता है

। ओरल हाइजीन यानी की मुंह की साफ-सफाई, दांत-मसूड़ों और जीभ के साथ-साथ शरीर को अन्य अंगों को भी स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक मानी जाती है। आपको भी जानकर अचरज हो रहा होगा, लेकिन अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि ओरल हाइजीन, विशेषकर दांतों की साफ-सफाई रखने की आदत आपको  हृदय और मनोरोगों के खतरे से सुरक्षित रखने में विशेष भूमिका निभा सकती है। शोध बताते हैं कि जो लोग नियमित रूप से ब्रश नहीं करते हैं उनमें दांतों के सड़न और मसूड़ों की समस्या के साथ-साथ हृदय रोग और डेमेंशिया जैसे मानसिक रोगों का खतरा बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मुंह का वातावरण कई तरह के बैक्टीरिया को बढ़ावा देने के लिए सबसे अनुकूल होता है। यही कारण है कि नियमित रूप से मुंह की साफ-सफाई का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है। एक आदर्श ओरल हाइजीन के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुबह-शाम ब्रश करने और कुछ खाने के बाद तुरंत अच्छे से कुल्ला करने की सलाह देते हैं। मौखिक अस्वच्छता किस प्रकार से हृदय और मनोरोगों का कारण बन सकती है, आइए इस बारे में आगे विस्तार से जानते हैं

क्यों जरूरी है दांतों और मुंह की नियमित सफाई? मुंह में निरंतर लार का निर्माण होता रहता है, जो कई प्रकार के बैक्टीरिया को बढ़ावा देने का अनुकूल माहौल बना देती है। उचित मौखिक स्वच्छता न रखने की स्थिति में  बैक्टीरिया के तेजी से बढ़ने और कई प्रकार के मौखिक संक्रमण का कारण बनने का जोखिम हो सकता है। खाना खाने के बाद भोजन के कुछ अंश दांतों और मसूड़ों के बीच फंस जाते हैं, अगर इन्हें अच्छे तरीके से साफ न किया जाए तो इसके कारण दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर स्थितयों में दांत निकालने तक की नौबत आ सकती है। यही कारण है कि सभी लोगों के लिए नियमित रूप से मुंह की सफाई करते रहना आवश्यक है। आइए जानते हैं यह किस प्रकार के गंभीर रोगों का कारण बन सकती है।

दांतों की अस्वच्छता और डेमेंशिया का खतरा कई शोध इस बारे में संकेत देते हैं कि जो लोग अपने दांतों को अच्छे तरीके से साफ नहीं करते हैं उनमें दांतों में सड़न और मसूड़ों की दिक्कत के साथ मनोरोग का भी जोखिम हो सकता है।  शोधकर्ताओं ने डेमेंशिया वाले लोगों में दांतों के क्षति की समस्या को काफी सामान्य देखा है। इसी से संबंधित न्यूरोलॉजी और न्यूरोसाइंस रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार दांतों के क्षय की स्थिति कुछ लोगों में डेमेंशिया के जोखिम को बढ़ावा दे सकती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक दांतों की समस्या जैसे पेरियोडोंटाइटिस डिजीज और मस्तिष्क में सूजन के बीच संभावित लिंक पाया गया है जोकि डेमेंशिया के जोखिम का कारण बन सकती है।

दांतों की समस्या और हृदय रोग एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि मौखिक अस्वच्छता विशेषकर दांतों की साफ-सफाई पर ध्यान ने देने की आदत हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकती है। इसी से संबंधित  यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि जो लोग अपने दांतों को दिन में कम से कम तीन बार ब्रश करते हैं, उनमें एट्रियल फाइब्रिलेशन और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर और जानलेवा समस्याएं होने का जोखिम कम होता है।

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