राजनीति

यूपी में करारी हार के बावजूद सपा को क्यों खुश होना चाहिए, ये हैं बड़े कारण

समाजवादी पार्टी रुझानों में बीजेपी से काफी पीछे (UP election 2022) चल रही है. अखिलेश यादव (akhilesh yadav) के धुआंधार जनसभा और प्रचार के बावजूद सपा सत्ता तक नहीं पहुंच पाई

यूपी विधान सभा चुनाव को लेकर वोटों की गिनती (UP election 2022) जारी है. दोपहर तक रुझानों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और अन्य दलों से काफी आगे चल रही है. हालांकि, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने पूर्ण बहुमत पाने का दावा किया था, लेकिन वह इस दावे से कोसों दूर नजर आ रही है. इसके बावजूद सपा के लिए यह चुनाव पिछले लोक सभा व विधान सभा चुनाव से काफी बेहतर रहा. अब तक के रुझानों के नतीजे हार के बावजूद सप को खुशी देने वाले हैं.  

सपा के पक्ष में नहीं रुझान

इस बार के चुनाव में सपा ( Samajwadi Party) ने सत्ता में पहुंचने के लिए काफी मेहनत की थी. खुद अखिलेश यादव ने बेरोजगारी, महंगाई आदि का मुद्दा उठाकर वोटरों को साधने की कोशिश की थी. इस दौरान अखिलेश यादव ने लगातार जनसभाएं की, जिसमें भारी भीड़ देखने को मिली थी. हालांकि, रुझानों के मुताबिक यह भीड़ वोटों में तब्दील होते हुए दिखाई नहीं दे रही है. 

वोट शेयर में वृद्धि

रुझानों में सपा के पिछड़ने के बावजूद इस बार पार्टी के लिए कई बात खुशी की हैं. इस बार सपा के वोट शेयर में काफी बड़ी वृद्धि देखने को मिली है. पांच साल पहले 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में समाजावादी पार्टी को महज 21.8 फीसदी वोट शेयर मिला था. इस बार पार्टी के वोटर शेयर में 10 फीसदी का इजाफा देखा जा रहा है. रुझानों के मुताबिक, इस बार सपा को करीब 32 फीसदी वोट शेयर मिला है. इसकी बड़ी वजह बहुजन समाज पार्टी के जनाधार का लगातार सिमटना है. वहीं, समाजवादी पार्टी बसपा के वोट शेयर को अपने पक्ष में करने में कामयाब रही है.

पिछले चुनाव से अधिक सीटें

साल 2017 के विधान सभा चुनाव की बात करें, तो समाजवादी पार्टी के गठबंधन को केवल 47 सीट मिली थी. हालांकि, इस बार सपा व गठबंधन दोपह 122 सीटों पर आगे चल रही है. ऐसे में यह बढ़त अगर सीटों में तब्दील होती है, तो सपा का प्रदर्शन काफी अच्छा माना जाएगा.

आगामी चुनाव के लिए पार्टी को मिलेगा जोश

पिछले 2 लोक सभा चुनाव और इस बार के विधान सभा चुनाव को मिला दिया जाए, तो सपा को यूपी में 4 बार हार का सामना करना पड़ा है. हालांकि, बढ़े हुए वोट शेयर और सीटों के साथ पार्टी अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए काफी हैं.   

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