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रूस ने कहा, RIC के जरिए भारत और चीन के बीच बेहतर होंगे संबंध

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि रूस-भारत-चीन (RIC) ग्रुप भारत और चीन के बीच विश्वास को बढ़ावा देने में उपयोगी हो सकता है। उन्होंने कहा है कि RIC विश्वास मजबूत करने के लिए उपयोगी हो सकता है।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि रूस-भारत-चीन (RIC) ग्रुप भारत और चीन के बीच विश्वास को बढ़ावा देने में उपयोगी हो सकता है। उन्होंने कहा है कि RIC विश्वास मजबूत करने के लिए उपयोगी हो सकता है। यह कुछ ऐसा है जिसका हम समर्थन करने जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच किसी RIC शिखर सम्मेलन पर कमेंट करने से बचते नजर आए। लावरोव ने RIC शिखर सम्मेलन पर बहुत नहीं कहा। हालंकि दिसंबर 2020 में रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने शिखर सम्मेलन की बात कही थी। यूरी ने पुतिन के भारत दौरे के बाद RIC शिखर सम्मेलन की बात कही थी।

जब तक चीन से मामला नहीं सुलझता कोई RIC सम्मेलन नहीं

ट्रिब्यून की रिपोर्ट बताती है कि साउथ ब्लॉक ने मॉस्को से साफ कहा था कि जब तक भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में तनावपूर्ण गतिरोध में हैं, तब तक ऐसा शिखर सम्मेलन असंभव है। शायद इसीलिए रूसी विदेश मंत्री ने सुझाव दिया है कि चीन और भारत सुरक्षा मुद्दों पर सीधी बातचीत कर मसलों को सुलझाएं। लावरोव ने कहा है कि मुझे पता है कि भारत और चीन के बीच सुरक्षा सहित कई मसलों पर सीधी बातचीत होती है। मुझे पता है कि दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी की हुई है। उन्होंने कहा है कि हम भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देते हैं। हाल में चीन के विदेश मंत्री वांग यी मालदीव और श्रीलंका के दौरे पर थे। रिपोर्ट्स बताती हैं कि वांग का यह दौरा नाकामयाब रहा क्योंकि श्रीलंका और मालदीव सरकार ने महसूस किया है कि चीन द्वारा उनकी संप्रभुता को कर्ज जाल के जरिए धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। यह बात एक यूरोपीय थिंक टैंक ने एएनआई को बताई है। यूरोपियन फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज (EFSAS) ने बताया है कि श्रीलंका देश की गंभीर आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान रहा। श्रीलंका आशंकित था कि उनकी स्थिति चीन के लिए मुनासिब हो सकती है जैसा कि पहले हंबनटोटा पोर्ट के साथ हुआ था। लेकिन सिर्फ यही कारण नहीं था। दोनों देशों को संप्रभुता की अधिक चिंता रही।

चीन के साथ संबंध संतुलित करेगा मालदीव

मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह ने भारत के साथ अधिक निकटता से बातचीत करके चीनी प्रभाव और कर्ज के जाल को सीमित करने की कोशिश की है। 2018 में इब्राहिम सोलिह मालदीव के राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने चीन समर्थक नेता अब्दुल्ला यामीन की जगह ली थी और तब से भारत के साथ मालदीव के संबंध पटरी पर वापस आ गए हैं। मालदीव भी श्रीलंका की तरह चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा है जिसे अमेरिका छोटे देशों के लिए कर्ज का जाल बताता है। मालदीव की सोलिह सरकार ने चीन के साथ समीकरण को संतुलित करने की भी मांग की है

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