स्वास्थ्य

गंभीरता से लें स्पाइन की चोट को

लिगामेंट्स और मांसपेशियों से स्पाइन को मिलता है सुरक्षा कवच फिर भी इसकी चोट को गंभीरता से लेना चाहिए। कई बार इसकी चोट बनती है

स्पाइन से गुजरने वाली स्पाइनल कार्ड जो गर्दन से कमर तक होती है, उसमें मौजूद तंत्रिकाएं मस्तिष्क और शरीर के मध्य संदेशों को ट्रांसफर करती हैं। इसलिए स्पाइन में होने वाली क्षति के कारण शरीर का मूवमेंट प्रभावित (पैरालेसिस की स्थिति) होता है।

इन्हें है ज्यादा खतरा

-16-30 वर्ष या 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग

जो लोग जोखिम वाली गतिविधियों में भाग लेते हैं, जैसे बिना सुरक्षा के ड्राइविंग या खेलकूद की गतिविधियों में भाग लेना

कारण

-रीढ़ की हड्डी में अचानक लगी कोई चोट

– सड़क दुर्घटनाएं

-खेलकूद या मनोरंजक गतिविधियों में लगी कोई चोट

-हिंसक गतिविधियों में लगी कोई चोट

– ऊंचाई से गिर जाना

लक्षण

-मूवमेंट प्रभावित होना

-संवेदना खत्म हो जाना

-नर्व के क्षतिग्रस्त होने से दर्द, कड़ापन या झनझनाहट महसूस होना

-हाथों, अंगुलियों, पैरों या पैरों की अंगुलियों में सुन्नपन होना

-कमजोरी महसूस होना और संतुलन बनाने में परेशानी होना

– शरीर के किसी भाग या पूरे शरीर का लकवाग्रस्त हो जाना

प्रमुख जांचें

-एक्स-रे

-सीटी स्कैन

-एमआरआई स्कैन

-म्येलोग्राम

उपचार

स्पाइन की चोट का तुरंत उपचार कराने की जरूरत होती है। अगर उपचार न कराया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। मामूली से लेकर मध्यम स्तर की चोटों को दवाइयों और दूसरे उपचारों से ठीक किया जा सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में सर्जरी का विकल्प अपनाया जाता है।

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