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अरुणाचल के युवक पर चीन की बर्बरता:दिन में तीन बार लातों से पीटते थे चीनी

अरुणाचल प्रदेश के युवक मिराम तारोन को कुछ वक्त पहले चीनी सेना ने बॉर्डर से अगवा कर लिया था। जिसके बाद उसे भारत को सौंपने से पहले 8 दिन तक टॉर्चर किया गया।

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अरुणाचल प्रदेश के युवक मिराम तारोन को कुछ वक्त पहले चीनी सेना ने बॉर्डर से अगवा कर लिया था। जिसके बाद उसे भारत को सौंपने से पहले 8 दिन तक टॉर्चर किया गया। इस बात का खुलासा खुद मिराम के पिता ने किया है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मिराम के पिता ओपंग तारोन ने बताया कि मेरा बेटा मानसिक रूप से इतना टूट चुका है कि वह किसी से बात नहीं कर पा रहा है।

ओपंग तारोन ने कहा- मेरे बेटे को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) हाथ-पैर और आंखों पर पट्टी बांधकर 209 घंटे तक प्रताड़ित करती रही। उसे बिजली के झटके दिए। हैवानों की तरह पीठ पर लात-घूंसे जड़े। मिरान ने मुझे बताया कि उसे नो मैन्स लैंड (भारत और चीन सीमा की ऐसी जगह जहां कोई नहीं होता) से पकड़ लिया गया था। इसके बाद उसे आंखों पर पट्टी बांधकर एक शिविर में ले जाया गया।

आखिरी मिनट तक टॉर्चर करती रही PLA

चीनी PLA ने चार दिन पहले मिराम को वाचा-दमई इंटरेक्शन पॉइंट पर भारतीय सेना को सौंपा।

मिराम का अंदाजा है कि वह जगह नो मैन्स लैंड से करीब एक किमी दूर रही होगी। उन्होंने कहा कि मिराम को 27 जनवरी को अरुणाचल के अंजॉ जिले में हमारी सेना को सौंपे जाने से कुछ मिनट पहले तक प्रताड़ित किया जाता रहा। उसे तब तक आंखों पर पट्टी बांधकर रखा गया था। ओपंग के मुताबिक मिराम के हाथ-पैर और आंखों की पट्‌टी सिर्फ उस वक्त हटाई जाती थी, जब खाने का वक्त हो या टॉयलेट जाना हो।

दिन में तीन बार लातों से पीटते थे चीनी

भारत लौटने के बाद मिराम का कोरोना टेस्ट हुआ। जिसके बाद उसे तीन दिन के लिए क्वारैंटाइन कर दिया गया।

ओपंग ने बताया कि शुरुआती वक्त में उसे तीन बार पीठ में लातें मारी गई। बिजली का झटका देने के लिए लाइटर जैसी छोटी चीजों का इस्तेमाल किया गया। उसे खाने के वक्त भी टॉर्चर किया गया। हर बार उसकी थाली में मीट भरकर दिया जाता था। भारत लौटने के बाद मिराम को एक वाहन से किबिथू ले जाया गया, जहां तीन दिन के लिए क्वारैंटाइन कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला जिंदों गांव के रहने वाले मिराम और उसके दोस्त को 18 जनवरी को चीनी सेना ने अगवा कर लिया था। मिराम का दोस्त किसी तरह चीनी चंगुल से भाग निकला और भारतीय सेना को इसकी सूचना दी। अगवा करने के पीछे चीन का हाथ बताया जा रहा था। लेकिन चीन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। हालांकि, 20 जनवरी को चीनी सेना ने अज्ञात नाबालिग के मिलने की बात मानी थी और उनके भारतीय होने की पुष्टि भी की।

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