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धार्मिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाना उद्देश्य -शांति स्वरूपानंद

जालौन - समीपस्थ ग्राम नरी में चल रहे 11 कुंडीय श्री बिष्णु महायज्ञ में पधारे चार धाम उज्जैन के प्रख्यात संत महामंडलेश्वर स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरी महाराज ने कहा है कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाना और अपनी संस्कृति से अवगत कराना होता है।

जालौन – समीपस्थ ग्राम नरी में चल रहे 11 कुंडीय श्री बिष्णु महायज्ञ में पधारे चार धाम उज्जैन के प्रख्यात संत महामंडलेश्वर स्वामी शांति स्वरूपानंद गिरी महाराज ने कहा है कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाना और अपनी संस्कृति से अवगत कराना होता है। यज्ञ और हवन से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा हटाने में मदद मिलती है। यह बात उन्होंने नरी गांव में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़ने पर समाज में हो रहे नैतिक पतन को रोकने में भी मदद मिलेगी। समाज के धर्म से विलग हो जाने और युवाओं के पाश्चात्य संस्कृति की ओर हुए रुझान की भारी कीमत हमारे समाज को चुकानी पड़ रही है।

युवा भोगवादी संस्कृति का गुलाम होता जा रहा है जिसके कारण पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों में ह्रास देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, लोगों को धार्मिक आयोजनों अस्तु यज्ञादि में बढ़चढ़ कर सहयोग करना चाहिए। इससे सामाजिक समरसता बढ़ती है और समाज के सभी वर्गों को एकसूत्र में पिरोने में मदद मिलती है। आज दूसरे संप्रदायों के लोग सनातन संस्कृति को बदनाम करने और लोगों को इससे विलग करने के लिए षड्यंत्र पूर्वक मुहिम चला रहे हैं। ऐसे लोगों को तभी सही जबाव दिया जा सकता है जब हम अपने धर्म को जानेंगे और अपने बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत का ज्ञान कराएंगे। यज्ञादि भवत पर्जन्या:, अर्थात यज्ञ होते रहने चाहिए इससे प्रकृति का संतुलन भी बना रहता है और वातावरण की अशुद्धियां दूर होती हैं।

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