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शव को नाले में फेंककर चले गए थे बिहार: हाथ पर गुदे टैटू से सड़ी गली लाश की पहचान होते ही दो हत्यारे गिरफ्तार

शव को नाले में फेंककर चले गए थे बिहार: हाथ पर गुदे टैटू से सड़ी गली लाश की पहचान होते ही दो हत्यारे गिरफ्तार

16 जनवरी को केशव पुरम के लॉरेंस रोड स्थित गंदा नाला में पुलिस को एक युवक की सड़ी गली लाश मिली थी। जिसका हाथ चुन्नी से बांधे थे। केशवपुरम में नाले से मिले मृत युवक के हाथ पर गुदे टैटू से उसकी पहचान होते ही पुलिस ने उसकी हत्या करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी और मृतक बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले थे और झगड़ा का बदला लेने के लिए आरोपियों ने युवक की हत्या कर शव को नाले में फेंककर बिहार भाग गए थे। युवक की लाश सड़ी गली अवस्था में मिली थी।
जिला पुलिस उपायुक्त उषा रंगनानी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के नालंदा निवासी अर्जुन और कमलेश राम के रूप में हुई है। 16 जनवरी को केशव पुरम के लॉरेंस रोड स्थित गंदा नाला में पुलिस को एक युवक की सड़ी गली लाश मिली थी। जिसका हाथ चुन्नी से बांधे थे। आस पास के इलाके में पुलिस ने घर-घर में जाकर मृतक की पहचान करने की कोशिश की, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो पाई। युवक की पहचान करने के लिए पुलिस ने इलाके में उद्घोषणा करवाई। यह सुनकर कुछ लोग सामने आए क्योंकि उनका एक रिश्तेदार भी काफी दिन से गायब था। उन लोगों को शव दिखाया गया। युवक के हाथ पर गुदे ओम टैटू से उसकी पहचान नालंदा बिहार निवासी बिपिन के रूप में हुई। वह करोल बाग में कूड़ा बीनने का काम करता था
पूछताछ में पता चला कि मृतक का करोलबाग में कूड़ा बीनने को लेकर दो लोगों से झगड़ा हो गया था। झगड़ा करने वाले दोनों युवक बिहार चले गए। पुलिस टीम नालंदा, बिहार पहुंचकर इलाके में मृतक और आरोपियों के बारे में पूछताछ की। आरोपी के परिचितों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। पुलिस टीम ने आरोपियों पर निगरानी बढ़ा दी। 16 फरवरी को दोनों के पंजाबी बाग के ट्रांसपोर्ट नगर झुग्गी में आने की जानकारी मिली। जहां पुलिस ने दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने बताया कि दस जनवरी को बिपिन से उनका झगड़ा हुआ था। वह उससे बदला लेना चाहते थे। उसी दिन नशे की हालत में विपिन को देखकर दोनों उसे लॉरेंस रोड ले गए और चुन्नी से गला घोंटने के बाद हाथ पैर बांधकर नाले में फेंक दिया। जांच के बाद पुलिस ने बतया कि तीनों बेरोजगार थे और 12 साल पहले दिल्ली आए। काम नहीं मिलने पर कूड़ा बीनने लगे।

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