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किराए की कोख पर संकट, अब आइवीएफ सेंटरों के सामने भी दिक्कत

सरोगेसी विनियमन और एआरटी बिल लागू होने के बाद निसंतान दंपती को आ रही समस्या। रिश्तेदार ही बन सकेगी सरोगेट मदर आइवीएफ सेंटर के पंजीकरण के लिए पांच लाख रुपये शुल्क। स्पर्म और एग डोनेशन पर भी नियम बने रोड़ा।

 सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 और प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक एआरटी के लागू होने से नए कानून में आइवीएफ सेंटरों पर संकट मंडराने लगा है। पंजीकरण की अनिवार्यता से आइवीएफ सेंटरों पर संकट मंडराने लगा है। कृत्रिम गर्भाधान का खर्चा छह से सात गुना बढ़ने के साथ ही सेंटरों की संख्या भी सीमित हो जाएगी।

इस साल लागू हुआ अधिनियम

25 जनवरी 2022 को सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 लागू कर दिया गया। किराए की कोख का व्यवसायीकरण बंद कर दिया गया है। अब रिश्तेदार ही सरोगेट मदर बन सकती हैं। यह किस तरह होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। इससे सरोगेसी बंद है। इसी तरह से आइवीएफ सेंटर के सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक एआरटी में पंजीकरण की अनिवार्यता कर दी गई है। इसमें मानक परखे जाएंगे, इसके बाद आइवीएफ सेंटरों को अनुमति दी जाएगी। जटिल प्रक्रिया होने के चलते छोटे शहरों में खुल गए आइवीएफ सेंटर बंद हो जाएंगे। बढ़े सेंटरों में कृत्रिम गर्भाधान का खर्चा बढ़ जाएगा।

इन्हें होती है किराए की कोख की जरूरत

− गर्भाशय न होने पर।

− टीबी की बीमारी से गर्भाशय की समस्या होने पर।

− कैंसर, गुर्दा, अस्थमा, उच्च रक्तचाव सहित अन्य बीमारियां, जिसमें गर्भधारण करना महिला के लिए जोखिम भरा होता है।

अब है ये प्रक्रिया

− रिश्तेदार ही सरोगेट मदर बन सकती हैं, उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं दी जानी है।

शादीशुदा महिला वह भी एक बार ही सरोगेट मदर बन सकेगी।

− महिलाएं एक बार ही एग डोनेट कर सकेंगी।

− पुरुष दो बार ही स्पर्म डोनेट कर सकेंगे

पहले करनी होगी यह प्रक्रिया

− अनुबंध करने के बाद कोई भी महिला सरोगेट मदर बन सकती है।

− महिला को नौ महीने के लिए गर्भधारण का खर्चा, बीमा और चिकित्सा की सुविाधा दी जाती थी, 12 से 15 लाख में सरोगेसी होती थी।

एआरटी में पंजीकरण कराने का शुल्क

− आइवीएफ सेंटर, सरोगेसी सेंटर पांच लाख रुपये।

− कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा वाले सेंटर एक लाख रुपये।

ये है हाल

− देश में आइवीएफ सेंटर 100000 से अधिक।

− एक फीसद मामलों में सरोगेसी।

− आगरा में आइवीएफ सेंटर 13 हैं।

− यहां हर महीने कृत्रिम गर्भाधान 180 से 200 तक।

− आइवीएफ का खर्चा एक से 1.80 लाख रुपये

नए बिल को लागू करने के बाद स्पष्ट नहीं किया गया है। केवल क्लीनिक के पंजीकरण खोल दिए हैं। सरोगेसी की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इससे सरोगेसी की आस के साथ रहे दंपती निराश होकर लौट रहे हैं।

डा. जयदीप मल्होत्रा, पूर्व अध्यक्ष फेडरेशन आफ आब्स एंड गायनिक सोसायटी आफ इंडिया (फाग्सी)

नए बिल से आइवीएफ सेंटर संचालित करना महंगा हो गया है। इससे आइवीएफ का खर्चा 1.50 लाख से बढ़कर सात से आठ लाख तक पहुंच जाएगा। चुनिंदा सेंटर ही रह जाएंगे।

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