राजनीति

राम नरेश यादव रिक्‍शे में बैठकर राजभवन गए थे

यूपी की जनता ने पूर्व सीएम राम नरेश यादव की जिस सादगी की कायल होकर अपना सिरमौर बनाया था, उसने ही बाद में उन्‍हें बेताज कर दिया था.

जनता का मन कब पलट जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. इसलिए तो कई बार ऐसे अप्रत्‍याशित नतीजे आते हैं, जिनका अंदाजा अच्‍छे से अच्‍छे राजनीतिक पंडित भी नहीं लगा पाते हैं. ऐसा ही एक चुनाव हुआ था यूपी के एटा जनपद में निधौलीकलां (वर्तमान में मारहरा) विधानसभा सीट में. इस सीट का राजनीतिक इतिहास बेहद रोचक रहा है. इस सीट का दखल लखनऊ की राजनीति में भी रहा है और यह सीट अपने मतदाताओं के अलग मिजाज के कारण भी जानी जाती है.

सीएम को कर‍ दिया था बेताज 

2012 में हुए परिसीमन के बाद मारहरा सीट बने निधौलीकलां ने 70 के दशक में ऐसा कारनामा किया कि हर चुनावों में लोग उसकी याद जरूर कर लेते हैं. दरअसल, 1977 में जब अप्रत्‍याशित रूप से राम नरेश यादव को यूपी का सीएम बनाया गया तो उपचुनाव में उन्‍हें निधौलीकलां से ही मैदान में उतारा गया था. जनता ने उन्‍हें भारी मतों से जिताया लेकिन जब 2 साल बाद वही राम नरेश यादव सीएम पद से इस्‍तीफा देने के बाद इस सीट से लड़े तो हार गए. जनता ने उन्हें बेताज कर दिया.

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