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जानें रुद्राक्ष का भगवान शिव से संबंध और इसके लाभ आइए जानते हैं

ऐसी मान्यता है कि रुद्राक्ष पहनने वाला व्यक्ति भगवान शिव का प्रिय होता है। 

हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसका संबंध भगवान शिव की आराधना से है। रुद्राक्ष का अर्थ है रूद्र यानी शिव के आँसु। ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। हिंदू धर्म का पालन करने वाले रुद्राक्ष की पूजा करते हैं और उसे धारण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि रुद्राक्ष पहनने वाला व्यक्ति भगवान शिव का प्रिय होता है। रुद्राक्ष धारण करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और व्यक्ति हर तरह की नकारात्मक शक्तियों से बचा रहता है। रुद्राक्ष पहनने के अनेक लाभ होते हैं और प्रभाव अचूक हैं। लेकिन रुद्राक्ष धारण करने के भी कई नियम होते हैं। आइए जानते हैं इन नियम और लाभ के बारे में… रुद्राक्ष पहनने के नियम 1. रुद्राक्ष कलाई, गले और ह्रदय पर ही पहना जाता है। इसे गले में धारण करना सबसे अच्छा माना जाता है। 2. हाथ पर 12, गले पर 36 और ह्रदय पर 108 दाने धारण किए जाते हैं। 3. रुद्राक्ष का एक दाना भी धारण किया जा सकता है, पर दाना ह्रदय तक, लाल धागे में लटका होना चाहिए। 4. इसे धारण करने का सबसे शुभ मुहूर्त शिवरात्रि, सावन का महीना या सोमवार का दिन माना जाता है। 5.रुद्राक्ष धारण करने से पहले इसे शिव जी को समर्पित करना चाहिए और उसी माला पर मंत्रों का जाप करना चाहिए। 6.इसे पहनने वाले लोगों को सात्विक रहना चाहिए और मांसाहारी भोजन नहीं खाना चाहिए। रुद्राक्ष धारण करने का फायदे 1.इसे धारण करने से तमाम तरह की शारीरिक समस्याएं दूर हो जाती हैं। 2.ह्रदय रोग से पीड़ित लोगों को रुद्राक्ष पहनने से बहुत लाभ होता है, ये बात वैज्ञानिक भी सिद्ध कर चुके हैं। 3. रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति पर महालक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है। 4.रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है साथ ही वो भाग्यशाली भी बनते हैं।

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