साहब, कुछ भी करके हमें बस मेडिकल भिजवा दीजिए। मेरा नाती बहुत बीमार है..मुझे देखकर सवेरे से मुस्करा नहीं रहा। इसकी मां भी रोते-रोते खामोश बैठी है। डॉक्टर कह रहे हैं कि यहां से ले जाओ, मेडिकल में इलाज मिलेगा। वहां जाने के लिए कैसे भी करके एंबुलेंस बुला दो। यह गुहार लगाते-लगाते दादी रानी की आवाज भर्रा गई।
बुधवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल में रानी और उनकी बहू खुद को अकेला महसूस करती रहीं। फर्श पर बैठी दादी की गोद में मासूम बच्चा गगन था और पीछे उसकी मां बैठी थी। उसके चेहरे पर घबराहट और थकान साफ दिख रही थी। आसपास ना कोई डॉक्टर, ना स्टाफ और ना ही कोई मददगार आया। ना किसी ने इस बिलखते परिवार को बैठने के लिए कुर्सी दी और ना पानी का पूछा।
दरअसल खिरनी गेट निवासी पंकज और डॉली का बेटा गगन पिछले कई दिन से बीमार चल रहा है। छह माह के इस बच्चे का उपचार एक वैद्य से चलता रहा, लेकिन कुछ आराम मिलने पर परिवार ने उपचार बंद कर दिया। बीते मंगलवार बच्चे को भूख लगी तो मां ने उसे पाउडर का दूध पिलाया जिसके बाद दोबारा बच्चे को ना भूख लगी और ना ही उसे मलमूत्र आया।

