उत्तर प्रदेशमथुरा

मथुरा के इस गांव की महिलाएं नहीं मनाती करवा चौथ

मथुरा में करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं

सती के श्राप के चलते महिलाएं नहीं रखती हैं व्रत सुरीर में करवाचौथ न मनाने के पीछे एक कहानी है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब डेढ़ सौ साल पहले गांव रामनगला  का ब्राम्हण युवक अपनी पत्‍‌नी को ससुराल से विदा कराकर सुरीर के रास्ते भैंसा-बुग्गी से गांव लौट रहा था.

करवाचौथ पर श्रृंगार भी नहीं करती हैं सुहागिनें यहां कई नव विवाहिताएं विधवा हो गईं. इसे देखकर बुजुर्गों ने इसे सती का श्राप मान लिया और गलती के लिए क्षमा मांगी. तभी से यहां की कोई महिला करवा चौथ और अहोई अष्टमी मनाना तो दूर

“परंपरा को तोड़ने कि हिम्मत किसी में नहीं” वह करवा चौथ के दिन व्रत नहीं रखतीं, बल्कि अपने परिवार की सलामती पर विश्वास रखती हैं. शांतिदेवी ने कहा कि सती माता अब श्राप नहीं, आशीर्वाद देती हैं

अपने चांद को छलनी में देखने की आस अधूरी अपने-अपने सुहाग की सलामती के लिए सभी व्रत रखना तो चाहती हैं,  जब उनके ससुराल वालों ने उन्हें यहां की परंपरा बताई तो सब पीछे हट गईं. उन्होंने व्रत रखने का ख्याल दिमाग से निकाल दिया. अपनी पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखना एक सपना बन कर रह गया

बाईटः महिला 12

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