स्वास्थ्य

महिलाओं में लाइफस्टाइल से संबंधित इन बीमारियों का खतरा होता है अधिक

भारतीय समाज में महिलाओं को बहुआयामी रूप में जाना जाता है

घर के कामकाज से लेकर दफ्तर संभालने तक, पिछले एक दशक में लगभग हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती देखी गई है। हालांकि महिलाओं से संबंधित जो एक चिंता अब भी जस का तस बनी हुई है वह है उनका स्वास्थ्य। आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर महिलाएं कार्य-जीवन का संतुलन बनाने में असमर्थ रह जाती हैं। यही कारण है कि देश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कई तरह की बीमारियों का जोखिम काफी अधिक होता है। हर साल 8 मार्च को महिलाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य के साथ ‘विश्व महिला दिवस’ मनाया जाता है। इस महिला दिवस हम महिलाओं से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में 68 फीसदी से अधिक महिलाएं जीवनशैली से संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। पचास फीसदी महिलाएं काम के दबाव और समय सीमा के कारण घर के खाने की जगह जंक फूड का अधिक सेवन करती हैं। इसके अलावा शारीरिक निष्क्रियता, अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतें और शरीर के पॉश्चर सही न होने जैसे कारक महिलाओं में कई तरह की बीमारियों के खतरे को बढ़ा रहे हैं। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि महिलाओं में किन लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा अधिक होता है, जिसको लेकर उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।

स्तन कैंसर का बढ़ता खतरा पिछले एक-दो दशक में भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं। खासकर शहरी महिलाओं की आबादी में अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के कारण इस कैंसर का खतरा अधिक बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो महिलाओं में इस कैंसर का खतरा अनुवांशिक हो सकता है, पर अल्कोहल का सेवन, बढ़ता वजन, शारीरिक निष्क्रियता और खान-पान में पौष्टिकता की कमी जैसे कारक इस कैंसर के खतरे को बढ़ा रहे हैं। 28 में से एक भारतीय महिला को अपने जीवनकाल में स्तन कैंसर होने की आशंका होती है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या भी काफी तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। आमतौर पर प्रजनन आयु वर्ग वाली महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है। यह एक हार्मोनल विकार है जो मासिक धर्म की अनियमितता, मोटापा और बांझपन का कारण बन सकती है। शहरी भारतीय महिलाओं में गतिहीन जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खाने की आदतों के कारण मोटापा का खतरा अधिक पाया गया है, जिसे  पीसीओएस का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है।

डिप्रेशन/चिंता विकार मानसिक स्वास्थ्य, मौजूदा समय की बड़ी समस्याओं में से एक है। भारतीय महिलाओं में डिप्रेशन/चिंता विकार के मामलों में भारी उछाल देखा गया है।  इसका मुख्य कारण लंबे समय तक काम करते रहना, सामाजिक-व्यावहारिक कारक और खुद के लिए समय न निकाल पाना माना जाता है। इसके अलावा नींद और व्यायाम की कमी, महिलाओं में शराब की बढ़ती लत जैसी आदतें अवसाद का कारण बन सकती हैं।

हृदय रोग और डायबिटीज अध्ययन में पाया गया कि गतिहीन जीवनशैली के कारण 5 में से 3 महिलाओं में 35 वर्ष की आयु में ही हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतें, शारीरिक निष्क्रियता, अनुचित शारीरिक मुद्रा जैसे कारक हृदय रोग के साथ डायबिटीज के जोखिमों को भी बढ़ा देते हैं। भारतीय महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अधिक देखा गया है।  हृदय रोग और डायबिटीज दोनों ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। 

 

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