स्वास्थ्य

एंटीबायोटिक दवाइयां लेने से हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

आप किसी भी तरह की दवा मेडिकल स्टोर से या किसी से पूछकर या समान बीमारी होने पर किसी दूसरे के पर्चे को देखकर खरीदकर खा लेते हैं तो ऐसा ना करें

द लैंसेट की रिपोर्ट का दावा है कि भारत में अधिकतर एंटीबायोटिक दवाएं तो बिना सेंट्रल ड्रग रेगुलेट की मंजूरी के बिक रही हैं. भारत में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल संतुलित तरीके से नहीं किया जाता. यानी, लोग मेडिकल स्टोर पर जाते हैं और एंटीबायोटिक खरीद लेते हैं और खा लेते हैं.

 

प्राइवेट हॉस्पिटल और क्लीनिक भी दो तरह के हैं. जो छोटे कस्बों में हैं वहां इसी तरह की एंटीबायोटिक मरीजों को प्रिस्क्राइब कर दी जाती हैं. जो थोड़े बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल और क्लीनिक हैं, वहां लोग छोटे-मोटे रोगों की वजह से इसलिए नहीं जाते क्योंकि वो डॉक्टर की फीस से बचना चाहते हैं.

चौंकानें वाले हैं आंकड़े – साल 2000 से 2010 के बीच एंटीबोयोटिक की खपत दुनियाभर में 36 प्रतिशत बढ़ी है. – 2019 में कुल दवाओं में 77.1 प्रतिशत एंटीबायोटिक दवाएं बिकीं. – जितनी भी एंटीबायोटिक दुनिया में बेची गईं, उनमें से 72.1 प्रतिशत एप्रूव ही नहीं थीं.

अगर आप किसी भी तरह की दवा मेडिकल स्टोर से या किसी से पूछकर या समान बीमारी होने पर किसी दूसरे के पर्चे को देखकर खरीदकर खा लेते हैं तो ऐसा ना करें. किसी भी तरह की बीमारी होने पर डॉक्टर से जरूर सलाह लें.

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