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अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे बच्चे व्यस्क होने तक भी इस विकार से पीड़ित रह सकते हैं।

बचपन में अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे बच्चे व्यस्क होने तक भी इस विकार से पीड़ित रह सकते हैं। सामान्य बच्चों की तुलना में ऐसे बच्चों में व्यस्क होने के शुरुआती दिनों में इस विकार के विकसित होने की संभावना ज्यादा होती है।

बचपन में अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे बच्चे व्यस्क होने तक भी इस विकार से पीड़ित रह सकते हैं। सामान्य बच्चों की तुलना में ऐसे बच्चों में व्यस्क होने के शुरुआती दिनों में इस विकार के विकसित होने की संभावना ज्यादा होती है। अमेरिका के पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों द्वारा किए एक अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आए हैं। बचपन में अनिद्रा की समस्या का किशोरावस्था और युवावस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने वाला यह पहला सामूहिक अध्ययन है। पीडियाट्रिक्स नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार इस अध्ययन की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई। पांच से 12 वर्ष के 502 बच्चों को इसमें शामिल किया गया। माता-पिता से बच्चों की नींद से संबंधित समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई। इन बच्चों को अनिद्रा के मध्यम व गंभीर लक्षण के रूप में वर्गीकृत किया गया। इन बच्चों की नींद पर किशोर होने (16 साल की उम्र) और व्यस्क (24 साल उम्र) होने तक अध्ययन किया गया। नतीजे यह निकले कि अनिद्रा से बचपन से जूझ रहे 43 फीसदी बच्चे किशोरावस्था व युवावस्था तक भी इस विकार से पीड़ित रहे, जबकि 27 फीसदी ने इसमें कमी का अनुभव किया। अन्य बच्चों ने इसमें उतार-चढ़ाव महसूस किया। वहीं, जिन बच्चों में अनिद्रा के लक्षण नहीं थे, उनमें से 15 फीसदी इस विकार से पीड़ित नजर आए। हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी है नींद साइकियट्री एंड बिहेवियेरल हेल्थ’ विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर जूलियो फर्नांडीज-मेंडोजा ने कहा, युवावस्था जीवन का वह चरण है जब मनुष्य कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझना शुरू करता है। हृदय रोग से घिरने से लेकर आत्महत्या करने की प्रवृति इसी चरण में जन्म लेती है। नींद संबंधी विकार स्लीप एपनिया और अनिद्रा हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े हैं। यह अध्ययन इसलिए भी जरूरी है क्योंकि 25 फीसदी बच्चे, 35 फीसदी किशोर और 45 फीसदी युवा अनिद्रा से पीड़ित हैं। अध्ययन से पता चलता है कि बच्चा जैसे-जैसे व्यस्क होता है, ये लक्षण समय और उसके साथ भी विकसित होते जाते हैं।
क्या होती है अनिद्रा – अनिद्रा में रोगी को पर्याप्त नींद नहीं आती, जिससे रोगी को आवश्यकतानुसार विश्राम नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। कई बार थोड़ी सी अनिद्रा से रोगी के मन में चिंता उत्पन्न हो जाती है, जिससे रोग और भी बढ़ जाता है। स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी होता है, लेकिन आजकल तमाम लोग अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे हैं। इस बीमारी को अंग्रेजी में इंसोमनिया कहा जाता है। यह एक प्रकार का नींद संबंधी विकार है।

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