विदेश

अमेरिका-नाटो से खफा यूक्रेन के राष्ट्रपति; बोले-अब किस बात का इंतजार किया जा रहा है?

यूक्रेन और रूस के बीच जंग की आशंका बढ़ती जा रही है। कहने को तो अमेरिका और नाटो यूक्रेन के साथ हैं

यूक्रेन और रूस के बीच जंग की आशंका बढ़ती जा रही है। कहने को तो अमेरिका और नाटो यूक्रेन के साथ हैं, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति के एक बयान से लगता है कि इनके बीच सब कुछ सही नहीं है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि उनके सहयोगी देश रूस के खिलाफ प्रतिबंध जैसे कदम नहीं उठा रहे हैं, क्या उन्हें इस बात का इंतजार है कि रूस अब यूक्रेन पर हमला कर दे।

जेलेंस्की का यह बयान रूस के हौसले बढ़ा सकता है। दूसरी तरफ, शनिवार रात दिए गए इस बयान पर अब तक अमेरिका या नाटो ने कोई रिएक्शन नहीं दिया है।

अमेरिका पर निशाना न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की का बयान सीधे तौर पर जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन पर निशाना है। अमेरिका रोज यह कह रहा है कि रूस किसी भी वक्त यूक्रेन पर हमला कर सकता है, लेकिन वो रूस की लगाम कसने के लिए सख्त फैसले नहीं कर पा रहा।

जेलेंस्की का बयान इसी बारे में था। उन्होंने कहा- अब किस बात का इंतजार किया जा रहा है? जब हमारी इकोनॉमी खत्म हो जाएगी, जब हमारे देश के कई हिस्सों पर दुश्मन का कब्जा हो जाएगा, तब आप प्रतिबंध लगाएंगे तो वो हमारे किस काम आएंगे? जेलेंस्की ने यह बयान म्यूनिख में सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया।

क्रीमिया का जिक्र जेलेंस्की ने अब तक मिले सहयोग के लिए पश्चिमी देशों का शुक्रिया अदा किया। इस दौरान ये भी जिक्र किया कि कैसे रूस ने क्रीमिया पर कब्जा किया था। उन्होंने कहा- हमारे दोस्तों और सहयोगियों के लिए यह जरूरी है कि वो हमें भरोसे में लिए बगैर हमारे देश के बारे में रूस से कोई समझौता न करें। हम डरे हुए नहीं हैं। अगर हम पर हमला हुआ तो हमें भी जवाब देना आता है।

जेलेंस्की का यह बयान अमेरिकी उप राष्ट्रपति से कुछ अलग है। कमला हैरिस ने कहा था कि पूरे यूरोप की सिक्योरिटी पर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति भी बार-बार यही दोहरा रहे हैं। जेलेंस्की इन्हीं बयानों से नाराज नजर आए। कहा- जब हम कब्र में चले जाएंगे, तब विदेशी सैनिक मदद के लिए आएंगे, इसके लिए हम तैयार नहीं हैं। नाटो में शामिल होने के बारे में हमने कोई फैसला नहीं किया है। बातचीत के रास्ते खुले हैं।

पुतिन से बातचीत की इच्छा जेलेंस्की ने कहा- मैं खुद रूसी राष्ट्रपति से बातचीत करना चाहता हूं। हमें बातचीत से ही किसी भी मसले का हल खोजना होगा। 1994 में हमने हमला झेला, तब पश्चिमी देशों ने मदद नहीं की थी। सोवियत रूस टूटा तो हमारे एटमी हथियार रूस के पास रह गए। हमारे देश का एक हिस्सा क्रीमिया था, आज रूस का उस पर कब्जा है। ये आपके स्विटजरलैंड, बेल्जियम और नीदरलैंड्स से भी बड़ा है। मैं एक बात बिल्कुल साफ कर देना चाहता हूं। हम अपने देश की हिफाजत करेंगे। आप साथ दें या न दें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button