Iran US Peace Talks: इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका शांति वार्ता फेल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने चीन द्वारा ईरान को हथियार भेजे जाने की तैयारी पर जवाब देते हुए कहा कि अगर चीन ऐसा करता है तो यह उनके लिए बहुत बुरा होगा। ट्रंप ने अपने इस बयान से चीन को कड़ी चेतावनी दी है।
ईरान को हथियार भेजा तो चीन की बढ़ेंगी मुश्किलें
ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “अगर चीन ऐसा करता है, तो उनको बड़ी मुश्किलें होंगी।” बता दें कि ट्रंप का यह बयान उन खुफिया रिपोर्टों के जवाब में आया है, जिनमें दावा किया गया है कि चीन ईरान को हवाई रक्षा प्रणालियां भेजने की तैयारी कर रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने बताया कि बीजिंग अगले कुछ हफ्तों में तेहरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम सप्लाई करने वाला है।
ईरान बनेगा यूक्रेन
ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अब चीन ने ईरान को भी यूक्रेन बनाने की तैयारी कर ली है। यानी अमेरिका को लंबे युद्ध में फंसाने की तैयारी, ठीक उसी तरह, जैसे कि अमेरिका ने रूस के खिलाफ यूक्रेन में किया। अमेरिका रूस से जंग लड़ने के लिए यूक्रेन को हथियारों की खेप भेजता रहा, जिससे यह युद्ध 4 साल से भी अधिक समय से जारी है। अब चीन ने वही चाल ईरान में चल दी है। इससे आशंका है कि ईरान और अमेरिका युद्ध भी लंबे समय तक यानी कई वर्षों तक जारी रह सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह सिर्फ ईरान और अमेरिका लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट समेत दुनिया के अन्य देशों के लिए भी बहुत बुरा सपना साबित होगा।
ईरान और अमेरिका जिद पर पड़े
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता 21 घंटे तक चली, लेकिन वह बेनतीजा रही। इसकी प्रमुख वजह यह थी कि अमेरिका और ईरान में से कोई भी अपनी शर्तों पर झुकने को तैयार नहीं हुआ। ईरान की मांग थी कि अमेरिका उसकी जब्त संपत्तियों को रिलीज करे और लेबनान को भी युद्ध विराम समझौते में शामिल किया जाए। जबकि अमेरिका की शर्त थी कि ईरान अपना परमाणु हथियार बनाने का कार्यक्रम बंद करे। मगर ईरान ने कहा कि वह परमाणु हथियार बनाना नहीं छोड़ेगा और यूरेनियम का संवर्धन जारी रखेगा। इसके बाद दोनों पक्षों में शांति वार्ता फेल गई। इससे भड़के हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका रवाना हो गए।

