आगरा के फतेहपुर सीकरी के रसूलपुर, पतसाल और मदनपुरा गांव की पहाड़ियों में मौजूद रॉक पेंटिंग्स को संरक्षित करने का प्रस्ताव फिर से भेजा जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पहले 5 अप्रैल, 2023 को इनके संरक्षण का प्रस्ताव भेजा था, जिस पर बीते साल 28 अप्रैल को हुई तकनीकी मूल्यांकन समिति की बैठक में दोबारा मूल्यांकन की सिफारिश की गई थी। अब दोबारा तीन गांवों की पहाड़ियों में मौजूद पेंटिंग्स को संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है।
पूर्व में भदरौली गांव भी इसमें शामिल था लेकिन इस बार के प्रस्ताव में इसे जगह नहीं दी गई है। एएसआई के सहायक अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. अक्षत कुमार कौशिक के अनुसार सीकरी के शैल चित्रों को संरक्षित करने का मामला प्रक्रिया में है। दोबारा प्रस्ताव मंगवाया जा रहा है। एएसआई की अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिता कुमार ने बताया कि भदरौली गांव पर आपत्ति आई थी, जिस पर उसे छोड़कर अन्य तीन गांव की पहाड़ियों में मौजूद चित्रों को संरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। तहसील स्तर पर कार्रवाई जारी है। अगले माह इसका प्रस्ताव भेज दिया जाएगा।
रॉक पेंटिंग पर जमा कालिख कराई साफ
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित धरोहरों में अभी रॉक पेंटिंग शामिल नहीं है। रसूलपुर गांव में अज्ञात व्यक्ति के आग जलाने से रॉक पेंटिंग पर कालिख जमा हो गई थी। एएसआई ने इसे पुरातत्व महत्व के नजरिए से साफ कराया। जिस जगह कालिख जमा हुई, उसी पहाड़ी में दो साल पहले तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति मंत्री मीनाक्षी लेखी इन पेंटिंग को देखने पहुंची थीं।

