यह एक मां का ही कलेजा हो सकता है जो आग में फंसे अपने मासूम बेटे को बचाने के लिए उसमें कूद गई और अपनी जान की बाजी लगा दी। आग में बेटे के साथ मां भी गंभीर रूप से झुलस गई। अपनी ममता और हिम्मत से वह बेटे को आग से तो निकाल लाई लेकिन उसकी जान न बचा सकी।
इलाज को ले जाते समय मासूम ने रास्ते में दम तोड़ दिया जबकि मां गंभीर हालत में दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। घटना रामगंगा के खादर क्षेत्र में बसे गांव मझरा हसनगढ़ी की है। गांव के निवासी इरफान टीन शेड और छप्परों के घर में पत्नी व बच्चों के साथ रहते हैं। बृहस्पतिवार शाम वह और परिवार के अन्य लोग काम से गए हुए थे।
उनकी पत्नी कासिफा पड़ोस में गई थीं। उनका चार साल का बड़ा बेटा अरमान और दो साल का छोटा बेटा अफ्फान घर पर छप्पर के नीचे खेल रहे थे। तभी अचानक किसी वजह से छप्पर में आग लग गई। इस पर अरमान ने भागकर इसकी जानकारी अपनी मां को दी। वह दौड़ कर आईं लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की लपटों में घिरे मासूम बेटे अफ्फान को बचाने के लिए मां कासिफा आग के दहकते शोलों के बीच कूद गईं। इसी दौरान जल रहा छप्पर दोनों के ऊपर गिर गया। फिर भी कासिफा ने हिम्मत नहीं हारी और वह जैसे-तैसे मासूम बेटे को तो बाहर निकाल लाईं लेकिन इस दाैरान दोनों बुरी तरह झुलस गए।
इधर, तमाम ग्रामीण भी पहुंच गए। उन्होंने घंटों की मशक्कत के बाद आग को बुझाया। बुरी तरह झुलसे मां-बेटे को परिजन इलाज के लिए पहले कांठ और बाद में मुरादाबाद के कई अस्पतालों में ले गए। चिकित्सकों की सलाह पर दोनों को दिल्ली ले जाया जा रहा था कि रास्ते में ही अफ्फान ने दम तोड़ दिया।
कुछ परिजन उसके शव को घर ले आए, तो बाकी ने कासिफा को दिल्ली ले जाकर भर्ती कराया। इरफान के चाचा अनीस ने बताया कि वहां कासिफा की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और वह जिंदगी मौत से जूझ रही है।

