UP: प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा, लेकिन अधिकारों पर असमंजस; 690 ग्राम पंचायतों में गाइडलाइन का इंतजार

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UP: प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा, लेकिन अधिकारों पर असमंजस; 690 ग्राम पंचायतों में गाइडलाइन का इंतजार

प्रधानों का कार्यकाल मंगलवार को छह माह के लिए बढ़ गया, लेकिन प्रधानों को अभी तक कोई स्पष्ट गाइड लाइन नहीं दी गई है। ऐसे में वह नीतिगत और सामान्य कार्यों की गाइड लाइन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

जिले में 690 ग्राम पंचायतें हैं। 26 मई को इनका पांच साल का कार्यकाल पूर्ण हो गया। शासन ने छह माह के लिए प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया है। प्रधान संघ के ब्लाक अध्यक्ष व विप्रावली के प्रधान देवानंद परिहार ने बताया कि प्रशासक बना दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनके कार्य क्या होंगे। शासनादेश में दो बातें कही गई, जिनमें वह सामान्य कार्य करते रहेंगे।

दूसरा नीतिगत फैसले लेने का अधिकार नहीं होगा। अब नीतिगत कार्यों में कौन-कौन से कार्य आते हैं। शासन और प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए। कुकथला के प्रधान पवन कुमार भी प्रशासक की भूमिका व अधिकारों को लेकर असमंजस में दिखे। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि सामान्य कार्य प्रशासक के रूप में प्रधान को कराने की अनुमति होगी, लेकिन नीतिगत निर्णय के लिए अनुमति उन्हें पंचायती राज विभाग के माध्यम से जिलाधिकारी ही देंगे। सामान्य और नीतिगत कार्यों के वर्गीकरण को लेकर जो शासन से निर्देश मांगे गए हैं।

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