केस-1: हिमाचल प्रदेश में बीटेक करने गया रावतपुर निवासी छात्र नशे के इंजेक्शन का लती हो चुका है। छात्र बहुत बुद्धिमान था और ऑनलाइन ट्रेडिंग से हर महीने दो से चार लाख रुपये कमाता है। पहले शौक में इंजेक्शन लिए और फिर यह आदत बन गया। अब वह बिना इंजेक्शन लगाए सो नहीं पाता। धीरे-धीरे उसने डोज इतनी बढ़ाई कि किसी भी तरह का नशा उस पर असर नहीं कर रहा है। 24 घंटे में दो घंटे ही मुश्किल सो पाता है। परेशान अभिभावक सेंटर पर दिखाने पहुंचे।
केस-2: सिंहपुर निवासी 21 वर्षीय युवा इंजेक्शन से नशा ले रहा था। उसने बताया कि उसकी प्रेमिका छोड़कर चली गई थी तो उसने नशे का सेवन करना शुरू कर दिया है। लड़का मध्यमवर्गीय परिवार से है और उसके पास अपनी गाड़ी घर सभी कुछ है। परिवार ने जब नशा नहीं छोड़ने पर घर से निकाल दिया तो वह नशे के लिए कूड़ा बीनने लगा और उसे बेचकर नशे के इंजेक्शन लगाना शुरू किया। परिवार को जब पता चला कि वह कूड़ा बीन रहा है तब सभी उसे लेकर सेंटर आए। अब उसे काफी हद तक फायदा मिला है।
बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए ले रहे थे इंजेक्शन
कानपुर शहर में नशे के इंजेक्शन की लत बहुत तेजी से पैर पसार रही है। हैलट, उर्सला के ओएसटी (ओपिओइड सब्स्टिट्यूशन थैरेपी) सेंटर में इन इंजेक्शन के लती 200 रोगी हर रोज पहुंच रहे हैं। पांच साल पहले यहां आने वाले रोगियों की संख्या सिर्फ 100 थी। चौंकाने वाली बात यह है कि रोगियों ने बताया कि ये शौक के लिए नहीं बल्कि तनाव और काम के दबाव में बेहतर परफॉर्मेंस देने के लिए इंजेक्शन ले रहे थे।
मेडिकल स्टोरों पर मिल जाते हैं इंजेक्शन के पैकेट
हैलट और उर्सला में आने वाले इन रोगियों का आयु वर्ग 20 से 60 वर्ष के बीच का है। इनमें 30 प्रतिशत महिलाएं हैं। इन रोगियों में करीब 35 फीसदी रोगी कल्याणपुर और सिंहपुर क्षेत्र के हैं। रोगियों ने बताया कि साकेतनगर, किदवईनगर, कल्याणपुर, सिंहपुर जैसे क्षेत्रों में आसानी से मेडिकल स्टोरों पर नशे के इंजेक्शन के पैकेट मिल जाते हैं। मेडिकल स्टोर वाले उन्हें ही यह पैकेट देते हैं, जो रोज लेने आते हैं।

