आगरा के ताजगंज में जूता कारखाना संचालक की आठ साल की बेटी की हत्या का आरोपी मुठभेड़ में ढेर हुआ था। पुलिस ने आरोपी की घेराबंदी कहां की थी? मुठभेड़ में कितने पुलिसकर्मी शामिल थे? गोली कितनी दूरी से मारी गई? कितने राउंड फायर किए गए? इन सभी सवालों की पड़ताल विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक करेंगे। क्राइम सीन को दोहराने के बाद रिपोर्ट देंगे। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया को अमल में लाया जाएगा।
ताजगंज क्षेत्र के जूता कारखाना संचालक की बेटी 24 मार्च की दोपहर को घर के बाहर से लापता हो गई थी। 25 मार्च की रात को उसका शव घर के सामने ही रहने वाले कारखाना संचालक के किरायेदार के कमरे में मिला था। गला काटकर हत्या के बाद शव को ड्रम में छिपाया गया था। आरोपी किरायेदार सुनील भाग गया था। अधिकारियों ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी लगाए थे।
200 से अधिक कैमरों को देखने के बाद आरोपी के बारे में सुराग मिला था। 28 मार्च की तड़के बमरौली कटारा क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में सुनील को मार गिराया गया था। उसको एक गोली लगी थी। उसके पास से तमंचा बरामद हुआ था। बाइक भी मिली थी। बाइक किसकी है? यह स्पष्ट नहीं हो सका था। मामले में जल्द ही विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम जांच करेगी। मुठभेड़ की घटना का क्राइम सीन दोहराया जाएगा। घटना कैसे हुई? क्या-क्या हुआ? वैज्ञानिक इन सवालों से पर्दा उठाएंगे।
हत्याकांड में तीन बिंदुओं पर चल रही जांच
आठ साल की बालिका की हत्या के मामले में पुलिस कारण अब तक पता नहीं कर सकी है। हत्यारोपी के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद पुलिस अपने स्तर पर जांच में जुटी है। तीन बिंदुओं पर जांच की जा रही है। पहला बच्ची के साथ बदनीयत करने के लिए आरोपी ने उसे अपने कमरे में बुलाया। बच्ची के शोर मचाने पर हत्या कर दी। दूसरा बच्ची के चाचा से आरोपी का विवाद। तीसरा बच्ची ने सुनील का किसी महिला के साथ देख लिया था।

