UP: पुष्टाहार घोटाले में दो कंपनियों को क्लीनचिट, गृह विभाग की मुहर, गड़बड़ी के साक्ष्य मिलने के किए थे दावे

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UP: पुष्टाहार घोटाले में दो कंपनियों को क्लीनचिट, गृह विभाग की मुहर, गड़बड़ी के साक्ष्य मिलने के किए थे दावे

बहुचर्चित पुष्टाहार घोटाले में नामजद दो कंपनियों जेवीएस फूड्स और खंडेलवाल सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की जांच में क्लीनचिट मिल गई है। वर्ष 2018 में दर्ज एफआईआर की विवेचना पूरी होने के बाद ईओडब्ल्यू ने अपराध के पर्याप्त साक्ष्य न मिलने की बात कहते हुए अंतिम रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी थी, जिस पर विभाग ने भी अपनी मुहर लगा दी है।

दोनों कंपनियों के खिलाफ तत्कालीन बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अपर निदेशक शत्रुघ्न सिंह की ओर से हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक जांच के दौरान ईओडब्ल्यू ने भी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े साक्ष्य मिलने का दावा किया था। शासन के निर्देश पर कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ उन्हें काली सूची में डालने की कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई थी। एफआईआर में दोनों कंपनियों पर पुष्टाहार आपूर्ति में अनियमितता, व्यापार कर (जीएसटी/वाणिज्यिक कर) गबन तथा अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

खंडेलवाल सोया इंडस्ट्रीज पर तैयार पंजीरी के प्रसंस्करण में अनियमितता, गुणवत्ता संबंधी खामियां और कर गबन के आरोप भी शामिल थे। शासन ने 18 मई 2019 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के लगभग आठ वर्ष बाद ईओडब्ल्यू ने अपनी विस्तृत विवेचना पूरी कर 20 मार्च 2026 को गृह विभाग को रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में कहा गया कि जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि करने वाले कोई ठोस अभिलेखीय अथवा मौखिक साक्ष्य नहीं मिले। इसके आधार पर अंतिम रिपोर्ट लगाने की संस्तुति की गई।

दोबारा जांच में साक्ष्य का अभाव

रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर स्थित जेवीएस फूड्स ने अप्रैल-मई 2003 के दौरान न्यूट्रो बिस्कुट की आपूर्ति से जुड़े बिलों में अधिक उत्पाद शुल्क का दावा किया था। इस मामले में विभाग ने लगभग 88 लाख रुपये की वसूली कर संबंधित कर विभाग में जमा करा दिए थे। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की उपनिदेशक अनुपमा शांडिल्य द्वारा 9 फरवरी 2026 को भेजे गए पत्र के बाद अंतिम रिपोर्ट की संस्तुति की गई। दिलचस्प तथ्य यह है कि विभाग के पत्र में कंपनियों पर लगाए गए अन्य आरोपों का कोई उल्लेख नहीं किया गया। पत्र में केवल यह कहा गया कि जेवीएस फूड्स के विरुद्ध कोई देयता शेष नहीं है, जबकि खंडेलवाल सोया इंडस्ट्रीज से संबंधित जानकारी अलग से उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई थी।

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