UP: आगरा में पानी के लिए हाहाकार, खाली बर्तन लेकर सड़कों पर उतरे लोग; जलकल विभाग के दावे हुए फेल

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UP: आगरा में पानी के लिए हाहाकार, खाली बर्तन लेकर सड़कों पर उतरे लोग; जलकल विभाग के दावे हुए फेल

आगरा में गर्मी बढ़ने के साथ ही जल संकट गहराने लगा है। यमुनापार के कई इलाकों में पानी की समस्या से लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है। शुक्रवार को इंदिरा ज्योति नगर इलाके के महिला-पुरुषों ने खाली बर्तन लेकर प्रदर्शन किया। जलकल का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। एक घंटे तक मौके पर हंगामा होता रहा।

यमुनापार के इंदिरा ज्योति नगर, टेढ़ी बगिया, रामबाग, शाहदरा, नरायच, फाउंड्री नगर, कालिंदी विहार, अशोक विहार कॉलोनी, यमुना ब्रिज घाट, प्रकाश नगर इलाके में जलसंकट से लोग परेशान हैं। एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित है। कई जगह पर पाइपलाइन भी है, लेकिन पानी की सप्लाई पूरी नहीं हो पा रही है। शुक्रवार को दोपहर एक बजे टेढ़ी बगिया इलाके की महिलाओं और पुरुषों ने सड़क पर आकर प्रदर्शन किया।

महिलाएं अपने हाथों में खाली बाल्टी और अन्य बर्तन लिए हुए थीं। कई इलाकों में गंदे पानी की समस्या से लोग परेशान हैं। क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि पानी बदबूदार आने से प्रयोग करने योग्य नहीं है। कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। कई हिस्सों में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

100 रुपये में पीने के पानी का ड्रम
इंदिरा ज्योति नगर निवासी विशाल वर्मा ने बताया कि टैंकर से पानी की सप्लाई होती है। एक ड्रम पीने का पानी 100 रुपये में मिलता है। ड्रम में तकरीबन 50 लीटर पानी आता है। वहीं अन्य प्रयोग के लिए 200 लीटर का ड्रम 50 रुपये तक में दिया जाता है।

कई साल से खरीदकर पीना पड़ता है पानी
सुशील नगर की रहने वाली नीलम और ललिता ने बताया कि पैरों से विकलांग हैं। उन्हें भी रोजाना पानी के इंतजाम के लिए दूर जाना पड़ता है। टंकी लेकर ऑटो आता है। तब पानी खरीदते हैं। कई साल से पानी की समस्या दूर नहीं हो रही है।

पानी की लाइन तो बिछा दी गई, नहीं शुरू हुई सप्लाई
नगला किशन लाल में पानी की लाइन तो बिछा दी गई लेकिन अभी तक सप्लाई शुरू नहीं हुई है। स्थानीय निवासी रूपेश ने बताया कि पानी टैंकर से खरीदना पड़ता है। मनमानी रकम वसूली जाती है। टैंकर नहीं आते तो अलग-अलग इलाकों में लगे पंप से पानी खरीदने जाते हैं। मजबूरी में टैंकरों से पानी खरीदना पड़ता है। जनप्रतिनिधि भी समस्या का समाधान नहीं करा पा रहे हैं।

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