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अनाज और पौधों से बनी चीजें खाने वालों की संख्या 400% बढ़ी, यह कैंसर-डायबिटीज रोकने में मददगार और फ़ायदेमन्द है

ब्रिटेन में हर साल वीगन खाने का चलन बढ़ता जा रहा है। अब ब्रिटिश बड़ी संख्या में मांसाहारी खाने के साथ-साथ दूध से बने उत्पादों से भी तौबा कर रहे हैं।

ब्रिटेन में हर साल वीगन खाने का चलन बढ़ता जा रहा है। अब ब्रिटिश बड़ी संख्या में मांसाहारी खाने के साथ-साथ दूध से बने उत्पादों से भी तौबा कर रहे हैं। इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए इंग्लैंड के लोग हर साल जनवरी में एनुअल वीगनरी चैलेंज ले रहे हैं। ब्रिटिश इस एक महीने में मीट, मछली, चिकन के साथ दूध, दही, घी का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। वीगन खाना कैंसर, डायबिटीज और मोटापे से लड़ने में भी मददगार साबित हो रहा है।

ब्रिटेन के लोगों ने साल 2014 की जनवरी से इस चैलेंज में हिस्सा लेना शुरू कर किया था, जिसके बाद 2021 तक 6 लाख लोग वीगन हो चुके हैं। 2014 के मुकाबले वीगन आबादी 400% बढ़ी है। वहीं, 2020 से लेकर अब तक ब्रिटेन में वीगन खाना परोसने वाले रेस्टोरेंट्स की संख्या दोगुनी हो गई है। मैकडोनाल्ड समेत करीब 12 हजार रेस्टोरेंट्स ऑनलाइन वीगन खाना सर्व कर रहे हैं।

वीगन खाना ऐसी डाइट है, जिसमें लोग मांसाहारी खाने के साथ दूध से बने उत्पाद का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। इस डाइट में सिर्फ शाकाहारी सब्जियां ही खाई जाती हैं। जो लोग इस तरह की डाइट को फॉलो करते हैं उन्हें वीगन कहा जाता है। कुछ लोग पर्यावरण की रक्षा के लिए, तो कुछ जानवरों के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए वीगन डाइट लेते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ भी मददगार ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महीने के आखिर तक 20 लाख लोग वीगन होने की चुनौती स्वीकार कर लेंगे, तब इनकी संख्या 80 लाख तक पहुंच जाएगी। इसमें छात्रों और युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च में बताया गया है कि अगर कोई इंसान वीगन हो जाता है वह अपने कार्बन फुटप्रिंट में 73% की कमी कर लेता है।

इतना ही नहीं, अगर कोई इंसान एक महीने के लिए ही वीगन हो जाता है तो वह मीट और डेयरी प्रोडक्शन में लगने वाले 1.26 लाख लीटर पानी की भी बचत करता है। रिसर्च के मुताबिक, अगर दुनिया का हर इंसान वीगन हो जाए तो 70% कार्बन एमिशन रुक सकता है। इससे ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की समस्या से बहुत हद तक निजात पाई जा सकती है। यानी सिर्फ खाने में बदलाव करने से ग्लेशियर का पिघलना, सूखा और बाढ़ जैसी समस्याओं से निजात मिल सकती है।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, भारत में दुनिया की सबसे ज्यादा शाकाहारी आबादी रहती है। 2020 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में 40 करोड़ से ज्यादा, यानी 30% लोग शाकाहारी हैं। इसमें भी वीगन की संख्या भी 50 लाख के ऊपर पहुंच चुकी है। भारत दुनिया में प्रति व्यक्ति मांस की खपत में आखिरी पायदान पर है।

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