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भाजपा का ब्राह्मण प्रत्याशी किसी काम का नहीं, वोट योगी और मोदी के नाम पर देंगे

बीजेपी के राज में अगर ब्राह्मणों को कोई फायदा नहीं है तो नुकसान भी नहीं है। इसलिए हम वोट BJP को करेंगे।

बीजेपी के राज में अगर ब्राह्मणों को कोई फायदा नहीं है तो नुकसान भी नहीं है। इसलिए हम वोट BJP को करेंगे। इसी वाक्य को घुमा-फिराकर प्रयागराज के शहर उत्तरी विधानसभा सीट के 50 ब्राह्मणों ने कहा। चित्रकूट, वाराणसी और गोरखपुर के भी हर 10 में से 9 या इससे ज्यादा ब्राह्मणों ने BJP को वोट देने को कहा।

दरअसल, हमने यूपी के ब्राह्मणों का मिजाज जानने के लिए 4 ऐसी सीटें चुनी थीं जिनमें ब्राह्मण वोटर सबसे ज्यादा है। हमने वहां पूरा दिन बिताया। उनके बीच रहने के बाद जो बातें हमने सुनीं, उन्हें ज्यो की त्यों इस रिपोर्ट में रख रहे हैं…

ब्राह्मण इलाका 1: चित्रकूट चित्रकूट, ब्राह्मण बाहुल्य इलाका है। चित्रकूट विधानसभा में 65 हजार से ज्यादा ब्राह्मण वोटर्स हैं। चित्रकूट का विधायक या सांसद कौन बनेगा यही डिसाइड करते हैं। सभी पार्टियों ने प्रचार की धमा-चौकड़ी मचा रखी है। अभी यहां भाजपा के चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय विधायक हैं, जो ब्राह्मण ही हैं। जब हम चित्रकूट के रामघाट के पास बसी ब्राह्मणों की बस्ती में चुनावी माहौल जानने पहुंचे और करीब 47 ब्राह्मणों से बात की तो उन्होंने कहा…

भाजपा का ब्राह्मण प्रत्याशी किसी काम का नहीं, वोट योगी और मोदी के नाम पर देंगे चित्रकूट के रामघाट से सटी ब्राह्मणों की बस्ती में कुछ तिलकधारी ब्राह्मणों ने कहा, “फोर व्हीलर से चलते हैं विधायक जी, रामघाट पर एकाध बार फोटो खिंचाते देखा है. हमने उनको कहीं कोई काम करते या करवाते हुए नहीं देखा। प्रत्याशी किसी काम का नहीं है लेकिन हम वोट योगी और मोदी के नाम पर ही करेंगे। हालांकि, योगी ने ठाकुरों को बढ़ावा दिया है लेकिन हमको ठाकुरों ने प्रताड़ित नहीं किया है। इसलिए हमें कोई दिक्क्त नहीं।

कोई भी जाति का हो, नहा धो के आए साथ में बिठा कर चाय पी लेंगे उसी गली में मिले रोहित द्विवेदी समेत कुछ और ब्राह्मणों ने कहा,”ब्राह्मण छुआछूत नहीं मानते। हम वेद मानते हैं, पंचवेद मानते हैं, रामचरित मानस मानते हैं। छुआछूत अब खत्म हो गया है। जो मानते होंगे उनकी सोच खराब है। छुआछूत का पूरा विरोध करते हैं। बस, इंसान को साफ-सुथरा होना चाहिए। साथ बिठा कर चाय पी लेंगे। ऊंच-नीच तो ब्राह्मण समाज के अंदर भी है। सरयूपारी, कान्यकुब्ज, सनाढ्य ब्राह्मण होते हैं। सब खुद को श्रेष्ठ मानते हैं और दूसरे ब्राह्मणों को नीचा।

जवान लड़की ने बोला, शादी जाति के अंदर। बूढ़े बोले, अब सब नॉर्मल है राजन तिवारी और मट्टू शर्मा ने कहा, “ब्राह्मण की बेटियों को ब्राह्मण से ही शादी करनी चाहिए नहीं तो आगे की नस्ल खराब होती है। ये बस ब्राह्मणों की बात नहीं है, स्वीपर धोबी के यहां शादी नहीं करता। सभी जातियों में ऐसा है. ब्राह्मण की बेटी हो या बेटा किसी और जाति में शादी करता है तो उसका बहिष्कार होता है, उसके परिवार का बहिष्कार होता है। पहले तो उन्हें गांव से भी बाहर कर दिया जाता था।”

तभी वहां मौजूद युवा लड़की नीतू तिवारी बोल उठी, ब्राह्मण लड़की को ब्राह्मण से ही शादी करनी चाहिए नहीं तो सब खराब हो जाता है। जबकि वहीं बैठे कई बुजुर्ग ब्राह्मणों ने कहा, “अब सब अंतर्जातीय विवाह कर रहे हैं। हमारे परिवारों में भी हुए हैं। धीरे-धीरे सब नॉर्मल होता जा रहा है।

भाजपा के कट्टर समर्थक ब्राह्मणों ने भी आरक्षण का विरोध किया खुल कर भाजपा का समर्थन करने वाले ब्राह्मणों ने कहा, आरक्षण देशहित में नहीं है। योगी सरकार को इसे खत्म कर देना चाहिए। आरक्षण हो भी तो जाति के आधार पर नहीं बल्कि गरीबी के आधार पर होना चाहिए। उम्मीद है योगी जी इस बार ऐसा देंगे।

जाते-जाते विधायक जी भी मिल गए… हम रिपोर्ट करके लौट ही रहे थे कि क्षेत्र के विधायक और लोकनिर्माण विभाग के राज्य मंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय भी मिल गए. हमने सवाल दाग दिया कि यहां के ब्राह्मण बोलते हैं कि हमें प्रत्याशी से कोई लेना देना नहीं है, कोई काम नहीं किया हम योगी को वोट देंगे। उपाध्याय जी का चेहरा डाउन हो गया और बोले “क्षेत्र के ब्राह्मण ठीक बोल रहे हैं, हम ब्राह्मण पार्टी को ज्यादा महत्व देते हैं।”

ब्राह्मण इलाका 2: प्रयागराज का शहर उत्तरी

बीजेपी को वोट तो देंगे, लेकिन कहते हैं, “इसमें क्या छिपाना, योगी ब्राह्मण नेता हैं

प्रयागराज के शहर उत्तरी विधानसभा में 4 लाख 20 हजार वोटर हैं। इनमें से 25% से ज्यादा यानी करीब 1 लाख 5 लाख तक सिर्फ ब्राह्मण वोटर हैं। इसलिए हमारी एक टीम ने पूरा दिन इसी क्षेत्र में बिताया। इस दौरान 46 ब्राह्मण घरों में गए। इनमें 50 से ज्यादा महिला-पुरुषों ने अपनी बातें रखीं। सबकी बातों में 3 बातें एक जैसी थीं…

  1. वोट बीजेपी को ही देंगे
  2. क्योंकि बीजेपी की सरकार में ब्राह्मण सुरक्षित महसूस करते हैं
  3. लेकिन योगी ब्राह्मण विरोधी नेता हैं

रसूलाबाद घाट पर गंगा किनारे चौकड़ी लगी तो ब्राह्मणों के दुख बाहर आए

शहर उत्तरी में ब्राह्मणों की बैठकी रसूलाबाद घाट पर सुबह-शाम हो रही है। खूब लोग जुटते हैं। हमें दो बार में 30-40 लोग मिले। इनमें इक्का-दुक्का निषाद परिवार के लोग थे। इन दोनों ही बिरादरियों के लोगों की एक सी बातें हैं।बीजेपी की मौजूदा सरकार ने ब्राह्मण और निषाद के लिए क्या किया? इसका सीधा जवाब किसी के पास नहीं मिला। इस सवाल को सुनकर 10 सेकेंड तक वो इधर-उधर देखते हैं। इसके बाद कहते हैं कि बीजेपी जाति आधारित काम नहीं करती।

लेकिन सिर्फ 10 मिनट की बतकही छिड़ने के बाद 23 साल के गौरव दुबे कहते हैं, “आप बताइए कि जब बीजेपी के यूपी में बुजुर्ग नेता उपेंद्र दत्त शुक्ल का निधन हुआ तो योगी उनके दरवाजे तक नहीं गए। क्यों? वो बीजेपी के उपाध्यक्ष भी रह चुके थे।”

46 साल के रमेश पांडेय माथे पर टीका लगाए हुए हैं। बोले, “मैं अपना वोट बीजेपी को ही दूंगा। लेकिन मैं किसी से बीजेपी को वोट देने को नहीं कहूंगा।”

ब्राह्मणों को ब्राह्मण ही खा रहे हैं

प्रयागराज के तेलियरगंज में रहने वाले सुधीर शुक्ला कहते हैं, “पड़ोस में तीन घर शुक्ला और हैं। बाबा के दौर में सब कौशांबी से आकर यहां बसे थे। लेकिन अब चारों परिवारों में आपस में बिल्कुल नहीं पटती। तीनों घरों में दूसरी जातियों की बहुएं आई हैं।”

उन्हें लगता है कि दूसरी जातियों में शादी से ब्राह्मणत्व खतरे में आ जाता है। इसी तरह की चीजें ब्राह्मणों की राजनीति से लेकर समाज में इज्जत कम कर रही हैं।

ब्राह्मण इलाका 3: वाराणसी का पक्का महाल इलाका

ब्राह्मणों के 100 से ज्यादा घर, 32 से ज्यादा मंदिर, 110 गलियां, हर चौखट पर देवी-देवताओं की तस्वीरें और भाजपा-सपा की सीधी टक्कर

बनारस के गोदौलिया चौक से काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक मकानों को गुलाबी रंग से रंग दिया गया है। इसी रास्ते पर 50 कदम सीधे चलते हुए आप पक्का महाल इलाके में पहुंचेंगे। यह काशी के सबसे पुराने मोहल्लों में से एक है और यहां 95 % ब्राह्मण आबादी रहती है। बाकी यादव और निषाद समाज के लोग हैं। इलाके की सकरी गलियां पुराने बनारस की याद दिलाती हैं। यहां के रहने वाले इसे लघु भारत भी कहते हैं।

सपा और भाजपा दोनों ने उतारे ब्राह्मण कैंडिडेट… भाजपा के चुनावी पोस्टर ज्यादा पक्का महाल की कपुरिया गली की दीवारों पर भाजपा और सपा के पोस्टर चिपके हुए हैं लेकिन सपा के ज्यादातर पोस्टर हाथों से खुरच दिए गए हैं। यह बात हमें थोड़ा खटकी तो हमने वहां से गुजर रहे दीपक त्रिपाठी से इसके बारे में पूछ ही लिया। दीपक ने भारी आवाज में जवाब दिया,”हम लोगों को भाजपा के अलावा किसी और पार्टी से मतलब नहीं है। सपा वाले ब्राह्मण कैंडिडेट को यहां से चुनाव लड़वा देंगे तो क्या जीत जाएंगे। ब्राह्मण इलाके से एक भी वोट अखिलेश को नहीं मिलेगा। चाहे जितना पोस्टर चिपका दें।”

पक्का महाल इलाका वाराणसी दक्षिण विधानसभा में आता है। इस सीट पर उसी की जीत होती है, जिसे ब्राह्मणों के सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं। यहां भाजपा से नीलकंठ तिवारी और सपा से किशन दीक्षित चुनाव लड़ रह हैं। दोनों ही ब्राह्मण कैंडिडेट हैं। इसलिए यहां इन्हीं दोनों के बीच सीधी टक्कर है।

बनारस का हर तिलक-जनेऊ पहनने वाला मोदी-योगी के साथ पक्का महाल इलाके से सटी पांडेय चाय की अड़ी पर लोग रशिया-यूक्रेन युद्ध को लेकर बाते कर रहे थे। हम वहां पहुंचे तो बात लड़ाई से हट कर राम मंदिर, काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर और आरक्षण तक जा पहुंची। चाय पी रहे रमेश शर्मा ने बताया,”चुनाव से पहले ब्राह्मणों का सबसे बड़ा मुद्दा जातिगत आरक्षण था। मोदी सरकार ने EWS आरक्षण लागू किया, इससे आज हम जैसे गरीब सवर्णों को 10% रिजर्वेशन मिल रहा है। इससे समाज के पोलियो रूपी जातिगत आरक्षण का खात्मा हो चुका है। बनारस का हर तिलक-जनेऊ पहनने वाला मोदी-योगी के साथ है।”

सोशल स्ट्रचर बिगाड़ रही इंटरकास्ट मैरिज… ब्राह्मण समाज में इसकी जगह नहीं कपुरिया गली में रहने वाले सुनील तिवारी ब्राह्मण टोला में विद्या पीठ स्कूल के प्रिंसिपल हैं। इंटरकास्ट मैरिज के सवाल पर वो कहते हैं,” इंटरकास्ट मैरिज का मैं सख्त विरोध करता हूं। यह व्यवस्था सोशल स्ट्रक्चर बिगाड़ती है।हमारे यहां कुंडली का मिलान कराया जाता है। गण मिलाया जाता है,गोत्र मिलाए जाते हैं। तब जाकर विवाह पवित्र माना जाता है।”

सुनील कहते हैं,”इंटरकास्ट मैरिज में शादी के बाद दूसरे वर्ग से आईं लड़कियों को हिंदू रीति-रिवाजों में ढलने में ही काफी समय लग जाता है। इससे परिवार के भीतर दूरियां बढ़ने लगती है। ऐसी शादियां सफल नहीं हो पाती हैं। यह सिस्टम अंग्रेजों और मुगलों के शासन के बाद ज्यादा बढ़ता चला गया। ब्राह्मण समाज में ऐसी शादियों की जगह नहीं है।”

इंटरकास्ट मैरिज पर युवाओं की सोच बुजुर्गों से अलग

इंटरकास्ट मैरिज पर दूसरी पीढ़ी की सोच यहां के बुजुर्गों से थोड़ी अलग है। पक्का महाल इलाके के रहने वाले 29 साल के अंशुमान उपाध्याय दशाश्वमेध धाट पर पूजा-पाठ करवाते हैं। उनका कहना है कि इंटरकास्ट मैरिज गलत नहीं है। मेरे मुताबिक अगर लड़की और लड़के दोनों के परिवार ऐसी शादी से सहमत हैं, तो इसमें कोई दिक्कत की बात नहीं है।

ब्राह्मण इलाका 4: गोरखपुर की नगरीय विधानसभा

हम वोट देब त बस बाबा का… गोरखपुर नगरीय विधानसभा में गीता प्रेस के पास मिले सभी ब्राह्मणों का एक सुर में यही कहना था कि वोट तो योगी जी को ही देंगे।

वो बोले कि थोड़ा मन मुटाव तो हर घर में होता है।

ब्राह्मणों और योगी जी में भी हुआ। लेकिन जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे, यूपी में फिरसे भगवा लहराएंगे।

गोरखपुर के तिलक-धारी बाबा के साथ

माया बाजार की गली में गीता प्रेस के पास खड़े ब्राह्मण हमारे सवाल करने पर बोले, “गोरखपुर की पावन धरती पर खड़े होकर हम ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं कि ब्राह्मण किसी और के साथ जाएगा।” योगी जी ने कभी ब्राह्मणों के साथ भेदभाव नहीं किया है। ब्राह्मणों की सुरक्षा के लिए ठाकुर होते हैं न कि उनको सताने के लिए।” वहीं पास की दुकान पर बैठे पांडे जी ने बताया, “2-3 साल पहले थोड़ा ठाकुरवाद था पर अब चीजें बदल गई हैं। अब यही बातें विपक्ष जनता को भ्रमित करने के लिए करता है।

आरक्षण से परेशान पर चुनाव पर कोई असर नहीं गीता प्रेस के बाहर चाट की दुकान के पास 3 लड़कों को हमने आरक्षण पर चर्चा करते सुना। ब्राह्मणों के आरक्षण पर वो हिचकिचाते हुए कहते हैं कि आरक्षण को लेकर सरकार से नाराजगी है, लेकिन इसका चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हमने आरक्षण के खिलाफ आवाज उठाई थी। अब योगी जी दोबारा आएंगे तो जरूर हमारी मांगे पूरी होंगी।

सच बोलने से डरते हैं ब्राह्मण व्यापारी

हम रिपोर्ट करके वापस जा रहे थे तो ई-रिक्शा पर बैठे नितिन मिश्रा ने ऑफ कैमरा हमसे कहा, “गोरखपुर के ब्राह्मण व्यापारियों में खौफ है कि कुछ बोलेंगे तो सीधे छापा पड़ जाएगा।” वो बोले, “यही वजह है यहां ब्राह्मण बोलता नहीं, जो करना होता हो सीधे वोटिंग के दिन कर देता है। और इस बार हम बाबा को वापस घर का रास्ता दिखाने वाले हैं।”

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