परिसीमन बिल पर क्या होगा DMK का रुख? स्टालिन की बैठक में हो गया साफ, सांसदों को कांग्रेस से दूर रहने की हिदायत

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परिसीमन बिल पर क्या होगा DMK का रुख? स्टालिन की बैठक में हो गया साफ, सांसदों को कांग्रेस से दूर रहने की हिदायत

संसद के मॉनसून सत्र को लेकर द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम यानी DMK के सांसदों की अहम बैठक का आयोजन गुरुवार को किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रमुख एमके स्टालिन ने गुरुवार को लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए की। इस बैठक में कई प्रस्ताव पास किए गए। इनमें कहा गया है कि पार्टी के सांसदों द्वारा आगामी संसद के मॉनसून सत्र के दौरान मेकेदाटु बांध का मुद्दा, कावेरी के पानी पर तमिलनाडु के अधिकार और राज्य की स्वायत्तता से जुड़े मामलों को जोर-शोर से उठाया जाएगा।

परिसीमन बिल पर रुख साफ

DMK के सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ये फैसला लिया गया कि पार्टी परिसीमन बिल का उसके मौजूदा रूप में विरोध जारी रखेगी, जो आबादी पर आधारित है और महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा है। पार्टी नए बिल का इंतजार करेगी और बिल में दी गई सिफारिशों के आधार पर ही आगे का फैसला किया जाएगा। आपको बता दें कि कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह परिसीमन बिल का विरोध करेगी।

मेकेदाटु बांध का विरोध

बैठक में पास किए गए पहले प्रस्ताव में कर्नाटक सरकार पर कावेरी के पानी में तमिलनाडु का हिस्सा छोड़ने से इनकार करने का आरोप लगाया गया। इसके कारण मेट्टूर बांध खोलने में देरी हुई और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। DMK ने कावेरी नदी पर बनने वाले मेकेदाटु बांध का विरोध भी दोहराया और मांग की कि केंद्र सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए एक ट्रिब्यूनल (न्यायाधिकरण) का गठन करे।

तमिलनाडु की चिंताएं उठाते रहेंगे- DMK

एक अन्य प्रस्ताव में, DMK ने कहा कि उसके सांसद संसद के दोनों सदनों में राज्य के अधिकारों, संघवाद और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर तमिलनाडु की चिंताएं उठाते रहेंगे। बैठक के बाद, स्टालिन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि DMK का हर सांसद तमिलनाडु के लोगों की “आवाज और जमीर” बनकर काम करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कानूनों की समीक्षा राज्य की स्वायत्तता और संविधान के नजरिए से करेगी।

सांसदों को कांग्रेस से दूर रहने की सलाह

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में स्टालिन ने कांग्रेस पार्टी के दोहरेपन की भी चर्चा की और कहा कि DMK की वजह से चुनाव में सीट जीतने वाली कांग्रेस ने सत्ता के लालच में आकर DMK के साथ विश्वास घात किया है। स्टालिन ने अपने सभी सांसदों से कांग्रेस पार्टी से दूरी बनाये रखने की हिदायत देते हुए कहा कि अब DMK और कांग्रेस के बीच सब खत्म हो गया है।

 

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