स्वास्थ्य

एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्ति डाइट में शामिल कर सकते हैं ये चीजें

एड्स के रोगियों के लिए तरल पदार्थों का सेवन भी काफी फायदेमंद हो सकता है

ऐसे में आप एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर फलों के रस का सेवन कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि जब बी ही जूस पियें ताज़ा निकल कर ही पिएं, कई घंटों पहले से बना हुआ जूस का सेवन न करें।
एड्स एक गंभीर रोग है, जो एचआईवी नामक एक वायरस के कारण होता है। यह रोग किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क बनाने से, संक्रमित सिरिंज के इस्तेमाल द्वारा और वंशानुगत कारणों से भी हो सकता है। आज भी बहुत से लोगो में इस बीमारी के लक्षणों के प्रति जागरूकता नहीं आयी है और अगर किसी संक्रमित व्यक्ति को अपनी इस बीमारी का पता भी चल जाता है, तो वह शर्म के कारण चिकित्सक के पास जाने से कतराता है। लेकिन इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत होने की बहुत आवश्यकता होती है। क्योंकि एड्स रोग से ग्रसित व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। और इम्युनिटी कमजोर होना मतलब रोगों के होने का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में डॉक्टर की दवाइयों के साथ-साथ रोगी को अपनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए, जो आपकी इम्युनिटी को मजबूत बना सकती हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि एड्स के रोगी अपनी डाइट में किन चीजों को शामिल कर सकते हैं।
एचआईवी/एड्स के रोगी स्ट्रांग इम्युनिटी के लिए खा सकते है ये चीजें 1. फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ एचआईवी/एड्स के रोगियों को अपनी डाइट में फाइबर युक्त चीजों को खाना चाहिए। बहुत से फलों और सब्जियों में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा दे सकते है। इसके लिए आप नाशपाती, सेब, एवोकैडो, ब्रॉकोली, बीन्स, ड्राई फ्रूट्स आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। फलों का रस है फायदेमंद एड्स के रोगियों के लिए तरल पदार्थों का सेवन भी काफी फायदेमंद हो सकता है। ऐसे में आप एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर फलों के रस का सेवन कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि जब बी ही जूस पियें ताज़ा निकल कर ही पिएं, कई घंटों पहले से बना हुआ जूस का सेवन न करें। ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त डाइट एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्ति को सोयाबीन, फ्लैक्स सीड, अखरोट, चिया सीड्स, सोया पनीर यानी टोफू आदि का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है। क्योंकि इन चीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है जो रोगी के स्वास्थय पर सकारात्मक प्रभाव डालने में कारगर हो सकता है।  

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