स्वास्थ्य

तेजी से बढ़ रहे हैं व्हाइट ब्लड सेल्स तो हो जाएं सावधान!

क्रॉनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन यह 40 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति में पाया जाता है।

क्या होता है क्रॉनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया (सीएमएल)

इसमें रोगी का बोन मैरो काफी ज्यादा मात्रा में व्हाइट ब्लड सेल्स का निर्माण करता है। पहले तो ये कोशिकाएं सामान्य रूप से काम करती हैं, लेकिन जैसे ही स्थिति बदलती है, बेकार एवं निष्क्रिय व्हाइट ब्लड सेल्स, जिन्‍हें मायलोब्लास्ट्स कहते हैं, बढ़ने लगते हैं। मायलोब्लास्ट्स का अत्यधिक निर्माण होने से अन्य रक्‍त कोशिकाओं के बनने में रुकावट पैदा होती है, जिससे कि शरीर में स्वस्थ प्लेटलेट्स और रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्‍त कणिकाएं) कम हो जाती हैं।

एक स्विच के रूप में कार्य करता है जो हमेशा के लिए ‘ऑन’ मोड में होता है। इससे काफी ज्यादा संख्या में व्हाइट ब्लड सेल्स का निर्माण होता रहता है। इसके साथ ही ब्लड प्लेटलेट्स में लगातार वृद्धि होती है, जो रक्त के थक्के जमने में मदद करती है।

सीएमएल के चरण

यह बीमारी तीन चरणों में आगे बढ़ती है- क्रॉनिक चरण, एक्सीलरेटेड चरण और ब्लास्ट चरण।

– क्रॉनिक चरण में मायलोब्लास्ट्स, 10% से भी कम ब्लड सेल्स का निर्माण करता है और परिपक्व व्हाइट ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ जाती है। इस चरण में सीएमएल के लक्षण हल्के या मौजूद नहीं होते और धीरे- धीरे बढ़ते हैं।

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