अलीगढ़उत्तर प्रदेश

अलीगढ़ में शीत लहर के साथ कड़ाके की ठंड में खुले आसमान तले लगे गरीबों के बिस्तर

शीत लहर के साथ कड़ाके की ठंड में मजदूर,गरीब लोगों के साथ यात्रियों को ठंड से राहत दिलाने में नगर निगम के अधिकारी कई शैल्टर होम के साथ 4 वाहनों से शहर के प्रत्येक इलाकों से गरीबों और बेसहारो को शैल्टर होम तक पहुंचा कर ठंड से निजात दिलाने का दावा कर रहे हैं,

शीत लहर के साथ कड़ाके की ठंड में मजदूर,गरीब लोगों के साथ यात्रियों को ठंड से राहत दिलाने में नगर निगम के अधिकारी कई शैल्टर होम के साथ 4 वाहनों से शहर के प्रत्येक इलाकों से गरीबों और बेसहारो को शैल्टर होम तक पहुंचा कर ठंड से निजात दिलाने का दावा कर रहे हैं,वहीं अलीगढ़ शहर के विभिन्न क्षेत्र रसलगंज, मालगोदाम,कंपनी बाग, सराय हकीम, आदि इलाकों में बे घर गरीब खुले आसमान के नीचे जमीन पर बिस्तर लगा कर सोते नजर आ रहे हैं, वहीं यात्री खुले आसमान तले लकड़ियां या कूड़ा करकट जला कर ठंड से राहत लेने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका नजारा अलीगढ़ नगर निगम की पोल खोल रहा है,नगर निगम के अधिकारी कह रहे है कि अब कोई भी मज़दूर, मुसाफिर, बेसहारा, खुले आसमान के नीचे नही सोएगा,सब को नगर निगम के द्वारा लगाई गए वाहन से शेल्टर होम तक पहुँचाया जाए गा, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है, वही मंगलवार की देर रात कड़कती ठंड में मीडिया द्वारा सर्वे किया गया और ऐसे लोगो से बात की जो आज भी खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर है,वही जानकारी देते हुए मज़दूरयतन कुमार निवासी हरदुआगंज ने बताया की वह मजदूरी पर काम करता है, और कभी कभी वह लेट हो जाता है तो इसलिए घर नही जा पाता है,इसीलिए उसको अपना बिस्तर खुले आसमान के नीचे लगाना पड़ता है, आगे बताया कि इस समय सर्दी बहुत है लेकिन क्या करे मजबूरी है इसीलिए उसको ज़मीन पर सोना पड़ता है, जब यतन से सवाल पूछा गया कि नगर निगम ने आप जैसे लोगो की मदद के लिए काफी प्रयास किया है,अलाव, शैल्टर होम की व्यवस्था की गई है तो आप लोग वहां क्यों नहीं जाते इस पर्यटन ने बताया कि उसको इस बारे में कुछ जानकारी ही नहीं है और ना ही कोई उसके पास आकर उसको बताता है इसीलिए उस जैसे दर्जनों लोग खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं।

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