1984 के सिख विरोधी दंगे: जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा मामले में सज्जन कुमार बरी, राउज ऐवन्यू कोर्ट का फैसला

3 Min Read
1984 के सिख विरोधी दंगे: जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा मामले में सज्जन कुमार बरी, राउज ऐवन्यू कोर्ट का फैसला

1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी, विकासपुरी हिंसा मामले में राउज़ ऐवन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया है। इस मामले में आरोपी पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार ने अपने बचाव में कहा था कि वह निर्दोष हैं, और कभी इसमें शामिल नहीं थे और न ही सपने में भी शामिल हो सकते हैं। सज्जन कुमार ने कहा था कि मेरे खिलाफ एक भी सबूत नहीं है। बता दें कि जनकपुरी, विकासपुरी की इस हिंसा के मामले मे दो लोगों को मौत हुई थी।

हाथ जोड़कर कोर्ट का शुक्रिया अदा किया

पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को जब कोर्ट ने बताया कि उन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में बरी कर दिया गया है, तो सज्जन कुमार ने दोनों हाथ जोड़कर कोर्ट का शुक्रिया अदा किया। सज्जन कुमार के वकील ने जानकारी दी है कि आज इस मामले मे उन्हें बरी कर दिया गया है। सज्जन कुमार की प्रेजेंस इस केस में साबित हो पाई है। 36 साल बाद सज्जन सिंह का नाम इस केस में डाला गया था।

क्या था पूरा मामला?

1984 में जनकपुरी और विकासपुरी में हुए दंगे के मामले में सज्जन कुमार आरोपी थे। मामला जनकपुरी और विकासपुरी पुलिस स्टेशनों में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। जनकपुरी का मामला 1 नवंबर, 1984 को दो सिखों, सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित है। दूसरा मामला विकासपुरी पुलिस स्टेशन में 2 नवंबर, 1984 को गुरचरण सिंह को जलाने के मामले में दर्ज हुआ था। सात जुलाई को अपना बयान दर्ज कराते समय पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने कोर्ट के सामने कहा था कि वह दंगों की जगह पर मौजूद नहीं थे और उन्हें झूठा फंसाया गया है।

वकील ने क्या बताया?

पूर्व सांसद सज्जन कुमार के वकील अनिल कुमार शर्मा ने कहा, “कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है क्योंकि विकासपुरी और जनकपुरी मामलों में उनके खिलाफ कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका। हमने कोर्ट को बताया था कि उन्हें टारगेट किया गया था, क्योंकि उनकी मौजूदगी साबित नहीं हो सकी। अब तक किसी भी गवाह ने उनका नाम नहीं लिया था, लेकिन अब 32 साल बाद ऐसा हुआ है। हम उन्हें बरी करने के लिए न्यायपालिका का शुक्रिया अदा करते हैं।”

Share This Article
Leave a Comment

Please Login to Comment.

Exit mobile version