लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होती जा रही हैं। इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने भी अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को गति दे दी है। पार्टी की ओर से प्रदेश में सर्वसमाज के बीच अपना जनाधार बढ़ाने और विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलनों के जरिए चुनावी माहौल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
BSP की रणनीति में संभावित प्रत्याशियों के नामों को लेकर भी प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आ रही है। विधानसभा स्तर पर आयोजित किए जा रहे कार्यकर्ता सम्मेलनों के जरिए पार्टी अपने संगठन को चुनाव के लिए सक्रिय करने में जुटी है।
2007 जैसी सफलता दोहराने की कोशिश
BSP आगामी चुनाव में सर्वसमाज को साथ लेकर व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार करने पर जोर दे रही है। पार्टी की रणनीति में ब्राह्मण समाज समेत समाज के विभिन्न वर्गों को संगठन से जोड़ने और उन्हें चुनाव में प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी शामिल है।
पार्टी नेतृत्व का लक्ष्य 2007 की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए मजबूत सामाजिक आधार तैयार करना बताया जा रहा है।
1. उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव सन् 2027 की तैयारियों के मद्देनज़र बी.एस.पी. के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने की ज़मीनी मज़बूती के साथ-साथ पार्टी उम्मीदवारों के चयन व उनके नामों की पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों में घोषणा करने आदि की प्रक्रिया भी चल रही…
— Mayawati (@Mayawati) August 19, 2026
सतीश चंद्र मिश्रा को चुनाव आयोग से जुड़ी जिम्मेदारी
चुनावी तैयारियों के बीच BSP के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कानूनी और मीडिया से जुड़े दायित्वों के अलावा अब उन्हें चुनाव आयोग से संबंधित मामलों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों से जुड़े मामलों, चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग के साथ समन्वय में सतीश चंद्र मिश्रा की भूमिका अहम हो सकती है।
कानून और चुनावी मामलों का लंबा अनुभव
सतीश चंद्र मिश्रा पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और BSP में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष और BSP सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा वह राज्यसभा सांसद भी रहे हैं।
उनके कानूनी अनुभव को देखते हुए पार्टी की चुनावी रणनीति में चुनाव आयोग से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी दिए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधानसभा स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर फोकस
BSP अब विधानसभा स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन को चुनावी मोड में लाने पर जोर दे रही है। पार्टी की ओर से कार्यकर्ता सम्मेलनों के जरिए स्थानीय स्तर पर संभावित उम्मीदवारों और सामाजिक समीकरणों को लेकर भी काम किया जा रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BSP की यह सक्रियता उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना की ओर इशारा कर रही है। आने वाले महीनों में पार्टी की ओर से उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
