बर्लिनः चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में सभी पक्षों से जापान में उभर रही चिंताजनक प्रवृत्तियों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के ताइवान पर दिए गए पूर्व बयान को 80 साल में किसी भी जापानी प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयान में सबसे घातक करार दिया है। वांग यी ने कहा कि वर्तमान जापानी प्रधानमंत्री ने ताइवान जलडमरूमध्य में किसी संकट को जापान के लिए “जीवन-खतरे वाली स्थिति”करार दिया है, जिसके आधार पर जापान सामूहिक आत्मरक्षा का प्रयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह 80 वर्षों में किसी जापानी प्रधानमंत्री द्वारा की गई पहली ऐसी सार्वजनिक टिप्पणी है। इसे चीन बर्दाश्त नहीं करेगा।
जापान ने दी चीन की संप्रभुता को चुनौती
वांग यी ने जोर दिया कि जापानी प्रधानमंत्री की ऐसी टिप्पणियां चीन की संप्रभुता को चुनौती देती हैं, वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की व्यवस्था को चुनौती देती हैं…जिसमें ताइवान को चीन में वापस लौटाया गया था। इसके साथ ही ऐसी टिप्पणियां जापान द्वारा चीन के प्रति किए गए राजनीतिक वचनों का उल्लंघन करती हैं। चीन इसे स्वीकार नहीं करेगा, न ही 1.4 अरब चीनी लोग इसे बर्दाश्त करेंगे। वांग यी ने यह बयान 14 फरवरी को जर्मनी के म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के “चाइना इन द वर्ल्ड” सत्र में दिया।
जापान में सैन्यवाद का भूत लौटने की चेतावनी
वांग यी ने इस दौरान जापान में “सैन्यवाद का भूत” के लौटने की चेतावनी दी और कहा कि यदि जापान फिर से “जुआ” खेलता है, तो उसे “तेज हार” और “अधिक विनाशकारी नुकसान” का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह टिप्पणी जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के नवंबर 2025 में संसद में दी गई उनकी उन टिप्पणियों के जवाब पर आधारित है, जिसमें उन्होंने ताइवान पर संभावित चीनी हमले को जापान के लिए “अस्तित्व संकट” बताया था और कहा था कि ऐसी स्थिति में जापान सामूहिक आत्मरक्षा के तहत सैन्य कार्रवाई कर सकता है। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने वांग यी के आरोपों को “तथ्यों पर आधारित नहीं” बताकर खारिज किया। ताइवान ने भी चीन को “वास्तविक खतरा” करार दिया और कहा कि बीजिंग संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देकर पाखंड कर रहा है। यह घटना चीन-जापान संबंधों में तनाव को और बढ़ाती है, जो ताइवान मुद्दे पर पहले से ही गहरा है।

