भारतीय फिल्म जगत के सुनहरे दौर में कई ऐसे सितारे उभरे जिन्होंने अपनी कला से एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया। कई वर्सेटाइल सितारों ने फिल्मों से लेकर टीवी तक अपनी छाप छोड़ी। इन्हीं सितारों में से एक ऐसा नाम है, जो अपनी कद-काठी और अभिनय की गहराई के कारण महानायक अमिताभ बच्चन के बचपन का पर्याय बन गया। जब ये एक्टर ‘महाभारत’ का अभिमन्यु बना तो भी लोगों के दिल में उतर गया। हम बात कर रहे हैं मयूर राज वर्मा की, जिन्हें दर्शक यंग अमिताभ के नाम से जानते हैं। आज भले ही वे फिल्मी चकाचौंध से दूर हों, लेकिन उनकी सफलता की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम रोमांचक नहीं है।
‘मुकद्दर का सिकंदर’ से मिली पहचान
मयूर राज वर्मा के अभिनय करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने का श्रेय साल 1978 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ को जाता है। इस फिल्म में उन्होंने अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाया था। एक बेसहारा लड़के की भूमिका में उनकी आँखों की चमक और संवाद अदायगी ने दर्शकों को भावुक कर दिया था। उनकी सादगी और प्रतिभा ने उन्हें उस दौर का सबसे लोकप्रिय और महंगा बाल कलाकार बना दिया। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि ‘लावारिस’ जैसी बड़ी फिल्मों में भी निर्देशकों की पहली और आखिरी पसंद मयूर ही हुआ करते थे। उनकी शारीरिक बनावट और हाव-भाव अमिताभ बच्चन से इतने मिलते-जुलते थे कि उन्हें बच्चन साहब का वास्तविक ‘अक्स’ माना जाने लगा था।
महाभारत का ‘अभिमन्यु’ और करियर का नया मोड़
फिल्मों में सफलता हासिल करने के बाद मयूर ने छोटे पर्दे की ओर रुख किया और यहाँ भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। बीआर चोपड़ा की ऐतिहासिक सीरीज ‘महाभारत’ में उन्होंने अर्जुन के पुत्र ‘अभिमन्यु’ का अविस्मरणीय किरदार निभाया। चक्रव्यूह की रणभूमि में एक वीर योद्धा के रूप में उनके अभिनय ने घर-घर में उन्हें नई पहचान दी। हालांकि इस बड़ी सफलता के बावजूद मयूर को बॉलीवुड में मुख्य अभिनेता के तौर पर वह मुकाम नहीं मिल पाया, जिसके वे हकदार थे। अभिनय की दुनिया में संघर्ष और सीमित अवसरों को देखते हुए उन्होंने अपने जीवन का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण फैसला लिया।
वेल्स में व्यापारिक सफलता और नया जीवन
अभिनय के क्षेत्र में संभावनाओं को कम होता देख मयूर ने ग्लैमर की दुनिया को छोड़ने का निर्णय लिया और विदेश जाकर अपनी नई पहचान बनाने की ठानी। आज मयूर राज वर्मा वेल्स (यूनाइटेड किंगडम) में एक प्रतिष्ठित और सफल व्यवसायी के रूप में स्थापित हैं। वे वहां अपनी पत्नी नूरी के साथ ‘इंडियाना’ नामक एक लोकप्रिय रेस्टोरेंट संचालित करते हैं, जहाँ उनकी पत्नी मुख्य शेफ की भूमिका निभाती हैं। अपनी कड़ी मेहनत और सूझबूझ से उन्होंने वहां अरबों का कारोबार खड़ा किया है। अब वे एक खुशहाल पारिवारिक जीवन जी रहे हैं और उनके दो बच्चे हैं।
कला के प्रति अटूट लगाव
भले ही मयूर ने व्यावसायिक फिल्मों से किनारा कर लिया हो, लेकिन उनके भीतर बसा कलाकार आज भी शांत नहीं हुआ है। वेल्स में रहते हुए भी वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों और कला से जुड़े हुए हैं। वे वहां युवाओं के लिए एक्टिंग वर्कशॉप और क्लासेस का आयोजन करते हैं, ताकि अपनी कला के ज्ञान को अगली पीढ़ी के साथ साझा कर सकें। मयूर राज वर्मा का यह सफर साबित करता है कि सफलता केवल कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि साहस के साथ जीवन में लिए गए सही फैसलों में भी छिपी होती है। पर्दे का वह छोटा बच्चा आज असल जिंदगी में भी एक ‘सफल सिकंदर’ बनकर उभरा है।

