लंबे समय से महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी भाषा का विवाद देखने को मिल रहा है। इस बीच सरकार द्वारा एक नोटिफिकेशन निकाला गया था जिसमें राज्य के सरकारी अधिकारियों के लिए नियोजित हिंदी भाषा की परीक्षा 28 जून को ली जानी थी लेकिन महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के विरोध के बाद अब इस परीक्षा को अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिया गया है।
संजय राउत ने क्या कहा?
वहीं, इस मुद्दे को लेकर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने कहा कि हिंदी का हमने कभी विरोध नहीं किया। मराठी पहले क्रमांक की भाषा है। राष्ट्रीय स्तर पर काम करने के लिए हिंदी और अंग्रेजी आवश्यक है।
मनसे ने क्या धमकी दी थी?
बता दें कि इस फैसले को लेकर राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने पहले ही अपनी भूमिका साफ कर दी थी और कहा था कि अगर यह परीक्षा हुई तो राज्य में जो भी स्थिति निर्माण होगी वह सरकार को झेलनी पड़ेगी। मनसे के नेता संदीप देशपांडे ने बुधवार सुबह सरकार को चेतावनी दी थी और कहा था कि अधिकारियों को हिंदी भाषा क्यों सीखनी चाहिए सरकार यह बताए ? मराठी उन्हें आनी चाहिए। मेरा अनुरोध है कि सरकार इस फैसले को वापस ले ले वरना 28 तारीख को एग्जाम सेंटर के बाहर जो भी तमाशा होगा उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री क्या बोले?
वहीं, अब इस परीक्षा के फैसले पर रोक लगाते हुए महाराष्ट्र सरकार में मराठी भाषा के मंत्री और शिवसेना के नेता उदय सामंत ने कहा कि हम फिलहाल इस परीक्षा पर रोक लगा रहे हैं। आगे चर्चा के बाद यह परीक्षा आवश्यक है या नहीं इस पर फैसला लिया जाएगा।

