AI और क्लाउड कंप्यूटिंग की बूम ने एक तरफ जहां लोगों की जिंदगी को आसान करने का काम किया है वहीं, कई पर्यावरणविद इसकी वजह से पानी की भारी किल्लत की आशंका जता रहे हैं। पिछले दिनों NatConnect फाउंडेशन ने इसे लेकर एक पत्र पिछले महीने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा है। NatConnect के डायरेक्टर बी एन कुमार ने आशंका जताई है कि एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ रही इंडस्ट्री भारत में पानी की बड़ी किल्लत पैदा कर सकती है। हालांकि, इसे लेकर अब सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
पानी की किल्लत की आशंका
रिपोर्ट के मुताबिक, NatConnect फाउंडेशन ने दावा किया कि भारत एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग का तेजी से बढ़ता हुआ मार्केट है। इसकी वजह से हर साल लगभग 37.5 बिलियन लीटर पानी खर्च होगा। इतना पानी हर साल करीब 7 से 8 लाख लोगों की प्यास बुझाता है। इतने पानी से देश के बड़े शहरों जैसे कि मुंबई में कई सप्ताह तक पानी की सप्लाई की जा सकती है।
केंद्र सरकार ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देत हुए कहा कि इंडस्ट्री इस समस्या के समाधान के लिए एडवांस कूलिंग टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है, ताकि पानी की खपत कम किया जा सके। केंद्रीय पब्लिक हेल्थ एंड एन्वायरोमेंटल इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, शहरी क्षेत्र में एक व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर पानी की खपत करता है।
एडवांस कूलिंग सिस्टम अपना रही कंपनियां
भारत में डेटा सेंटर की कैपिसिटी 2020 में 375MW से बढ़कर 2025 में 1,500MW तक पहुंच कई है। पिछले 5 साल में डेटा सेंटर की कैपेसिटी में लगभग 5 गुना का इजाफा किया गया है। हालांकि, सरकार की तरफ से कहा गया है कि भारत में मौजूद डेटा सेंटर में एडवांस कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। कंपनियां डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, अडायबेटिक कूलिंग और इमर्सन सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं, जो पानी की खपत को काफी हद तक कम करता है। पानी ही नहीं एनर्जी की खपत भी इसकी वजह से कम हो रही है।
पिछले दिनों गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भी कहा कि अब समय आ गया है कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित किए जाए। अंतरिक्ष में फ्लोटिंग डेटा सेंटर स्थापित करने से पानी की खपत को कम किया जा सकता है। साथ ही, ये फ्लोटिंग डेटा सेंटर सूर्य की किरणों से बिजली लेते रहेंगे। इसकी वजह से उर्जा की खपत भी कम होगी। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भी सुंदर पिचाई के इस आइडिया का समर्थन किया और कहा कि पहले ही वो अंतरिक्ष में डेटा सेंटर लगाने की संभावनाओं पर काम करने की बात कह चुके हैं।

