हाथरस जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चार साल में 118 बच्चों के जीवन में नई रोशनी भरी है। जन्मजात विकलांगता यानी क्लब फुट (टेढ़े-मेढ़े पैर) से जूझ रहे इन बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के काबिल बनाया गया है। कभी लाचारी में रेंगने को मजबूर ये नन्हे कदम अब नई उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।
क्लब फुट ऐसी समस्या है जिसमें बच्चे के पैर जन्म से ही अंदर की ओर मुड़े होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर 1000 बच्चे में एक को यह समस्या होती है। सही समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बच्चे उम्र भर के लिए दिव्यांग हो जाते हैं। जिला अस्पताल में विशेष कार्यक्रम के तहत संचालित क्लब फुट क्लीनिक के जरिये पिछले चार वर्षों में अब तक 118 बच्चों को लाभ हुआ है। चिकित्सकों की टीम ने पोंसेटी तकनीक (प्लास्टर और मामूली सर्जरी) के जरिये इन बच्चों के पैरों को सीधा किया। हर शनिवार को एक एनजीओ की मदद से जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में कैंप भी लगाया जाता है।
क्लब फुट गंभीर समस्या है, जो जीवनभर अपंगता का कारण बन सकती है, इसलिए जन्म होते ही उपचार जरूरी है। अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। आरबीएसके की टीम व आशा, एएनएम जन्मजात बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को चिह्नित करती हैं और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाती हैं।-डाॅ. राजीव गुप्ता, एसीएमओ
जन्म के समय बच्चे के पैरों में जरा सा भी टेढ़ापन दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें। जिला अस्पताल में इसके उपचार की पर्याप्त व्यवस्था है। पिछले चार वर्षों में करीब 118 बच्चों को लाभ मिला है।-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस

