यमुना एक्सप्रेस-वे के भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को करीब 16 साल बाद अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा। मंगलवार को गौतमबुद्ध नगर में शुरुआत हो गई। कैंप लगाकर 340 किसानों को 57 करोड़ रुपये बांटे गए। अब आगरा, मथुरा, अलीगढ़ और हाथरस के प्रभावित किसानों के लिए बजट की मांग की गई है।
वर्ष 2009-10 में एत्मादपुर से परी चोक तक 165.5 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे का करीब 10 हजार करोड़ की लागत से निर्माण हुआ था। एक्सप्रेस-वे में आगरा के किसानों की भूमि गई थी। अब जेपी इंफ्राट्रेक वर्तमान में सुरक्षा रीयलिटी अतिरिक्त मुआवजा बांटेगी। यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश के अनुसार किसानों को लंबे समय से 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर दिया जाना बाकी है।
इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। भुगतान प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि गांवों में ही कैंप लगाकर किसानों को भुगतान सुनिश्चित किया जाए। कैंप में संबंधित कंपनी के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे, ताकि लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा सके।
गौतमबुद्धनगर के बाद आगरा, हाथरस, अलीगढ़ और मथुरा के किसानों को भी अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा। यीडा के एसीईओ राजेश कुमार ने बताया कि इन जिलों के किसानों के लिए 591 करोड़ रुपये की मांग कंपनी को भेजी गई है। कोर्ट के आदेश के तहत कंपनी को कुल 1334 करोड़ रुपये अतिरिक्त मुआवजे के रूप में यमुना प्राधिकरण के माध्यम से देना है। प्राधिकरण का कहना है कि इन क्षेत्रों में जल्द ही विकास कार्य शुरू होने हैं। ऐसे में पहले किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देकर लंबित मामलों का समाधान किया जाएगा, ताकि विकास परियोजनाओं में कोई बाधा न आए।
इन गांवों में मुआवजा वितरण शुरू होगा
जगनपुर अफजलपुर, दनकौर, निलौनी शाहपुर, मिर्जापुर, सलारपुर और अच्छेजा बुजुर्ग।

