उत्तराखंड के रामनगर की उत्तरकाशी में दयारा बुग्याल ट्रेक के दौरान लापता हुई 23 वर्षीय बबीता पांडे की तलाश लगातार जारी है। 12 दिन से प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और वन विभाग की टीमें दिन-रात सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। लेकिन हर बीतते दिन के साथ परिवार की चिंता और दर्द बढ़ता जा रहा है। रामनगर स्थित बबीता के घर में हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही दुआ है “बस बबीता सकुशल घर लौट आए।”
सुरक्षित वापसी की राह देख रहा परिवार
रामनगर में बबीता के घर का माहौल पूरी तरह गमगीन है। परिवार के सदस्य हर पल उसकी सुरक्षित वापसी की राह देख रहे हैं। बबीता के पिता गोपाल पांडे की आंखों में बेटी की याद और चिंता साफ दिखाई देती है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी एकमात्र इच्छा है कि उनकी बेटी किसी भी तरह सकुशल घर लौट आए।
पढ़ाई में तेज है बबीता,
MBA के साथ करती है पार्ट-टाइम नौकरी गोपाल पांडे बताते हैं कि बबीता पढ़ाई में बेहद होनहार है। वह एमबीए की पढ़ाई कर रही है और साथ ही पार्ट-टाइम नौकरी भी करती है। अपने सपनों को पूरा करने के लिए वह लगातार मेहनत कर रही थी। लेकिन 30 मई को ट्रेकिंग के दौरान अचानक उसके लापता होने की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
5 साल पहले दिव्यांग हो गए थे पिता
करीब पांच साल पहले एक सड़क दुर्घटना में गोपाल पांडे गंभीर रूप से घायल हो गए थे और अब पूरी तरह दिव्यांग हैं। वह चल-फिर नहीं सकते। ऐसे में बेटी के लापता होने की खबर उनके लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। पिता का कहना है कि उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि ट्रैकिंग पर गई उनकी बेटी के साथ ऐसा कुछ हो जाएगा।
बबीता को याद कर रो पड़ती हैं दादी
परिवार की पीड़ा उस वक्त और ज्यादा छलक उठती है जब बबीता की दादी लक्ष्मी पांडे अपनी पोती को याद करते हुए रो पड़ती हैं। हाथ जोड़कर वह प्रशासन और बचाव दलों से अपील कर रही हैं कि किसी भी तरह उनकी पोती को सुरक्षित खोज लिया जाए। लापता बबीता के बारे में बात करते हुए उसकी मां अंजू पांडे की आंखों से भी आंसुओं की धारा बहने लगती हैं। उन्होंने बताया कि जिन दोस्तों के साथ बबीता दयारा बुग्याल आई, वह कुछ समय पहले ही उसके दोस्त बने थे।
बबीता को ढूंढने में लगे दोनों छोटे भाई
बबीता दो भाइयों की इकलौती बहन और परिवार की सबसे बड़ी संतान है। बड़ा भाई हर्षित पांडे और उनकी मां उत्तरकाशी में बचाव टीमों के साथ मौजूद हैं, जबकि छोटा भाई तनुज पांडे, दादी और दिव्यांग पिता रामनगर में उसकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं। पूरा परिवार पिछले कई दिनों से चिंता और बेचैनी के दौर से गुजर रहा है।
परिवार को गड़बड़ी की आशंका
12 दिन बीत जाने के बाद भी बबीता का कोई पता नहीं है ऐसे में परिवार को इस मामले में कुछ गड़बड़ी महसूस हो रही है। परिवार को लग रहा है कि बबीता किसी दुर्घटना का शिकार हुईं है या उसकी किडनैपिंग हुई है। पुलिस ने बबीता के साथ ट्रैकिंग पर गए दोनों दोस्तों से कई दौर की पूछताछ की है। परिजनों की शिकायत के आधार पर दोनों साथियों के खिलाफ अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। सर्च ऑपरेशन के साथ ही पुलिस उनकी मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और बयानों की जांच कर रही है।
29 मई को लापता हुई थी बबीता
बता दें कि 29 मई को बबीता अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं और गोई नामक स्थान पर रुकी थीं। 30 मई को ट्रेकिंग के दौरान वह अचानक लापता हो गईं। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर कई एजेंसियां संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। वहीं पुलिस ने कोतवाली मनेरी में मामला दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी है। फिलहाल पूरा उत्तराखंड बबीता की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहा है।

