एक न्यायालय ऐसा भी: स्टेनोग्राफर के रिटायर होने से लटके 1200 मामले, सात महीने से एक भी आदेश नहीं

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एक न्यायालय ऐसा भी: स्टेनोग्राफर के रिटायर होने से लटके 1200 मामले, सात महीने से एक भी आदेश नहीं

वाराणसी जिले में एक ऐसा न्यायालय भी है जहां बीते 7 महीने से एक भी मामले में फैसला नहीं आया है। इसका कारण स्टेनोग्राफर का न होना है। वाराणसी के उपभोक्ता फोरम में स्टेनोग्राफर के रिटायर होने से 1200 से ज्यादा मामलों के फैसले लटके हैं। उपभोक्ता फोरम की ओर से स्टेनोग्राफर की नियुक्ति के लिए चार बार पत्राचार भी किया जा चुका है, लेकिन अब तक न तो पत्र का जवाब आया और न ही स्टेनोग्राफर। 

बाजार में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए जिले में जिला उपभोक्ता फोरम है। फोरम में आने वाली शिकायतों का निस्तारण अधिकतम छह माह में हो जाना चाहिए। मगर, वाराणसी के उपभोक्ता फोरम में बीते 7 महीने से 1200 से अधिक फाइलें फैसले के इंतजार में लंबित हैं। समय से शिकायतों का निस्तारण न होने से उपभोक्ता परेशान हैं। हालांकि अंतर सिर्फ इतना है कि अन्य न्यायालयों की तरह यहां तारीख पर तारीख तो नहीं मिल रही सिर्फ फैसला रोक कर रखा गया है। 

मार्च से अब तक चार बार लिखा गया पत्र

उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष ने बताया कि स्टेनोग्राफर की तैनाती के लिए सात महीने से पत्राचार किया जा रहा है लेकिन निदेशालय से किसी भी पत्र का जवाब नहीं आया। निदेशालय से संविदा या मानदेय पर भी स्टेनोग्राफर उपलब्ध कराने की मांग की गई लेकिन वो भी सुनवाई नहीं हुई, ऐसे में काम प्रभावित हो रहा है।

50 लाख रुपये तक के उपभोक्ता फोरम में होते हैं दावे 
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की स्थापना जनपद में वर्ष 1988 में की गई थी। फोरम के समक्ष उपभोक्ता व्यक्तिगत रूप से पेश होकर या पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यहां उपभोक्ता फोरम 50 लाख रुपये तक के दावा से संबंधित मामले दर्ज कर सुनवाई कर सकता है।

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