उत्तराखंड की नामी दवा कंपनी के नाम से बेची जा रही नकली दवाओं के तार अलीगढ़ से जुड़े पाए गए हैं। आगरा में दवा बेचने वाले आरोपी से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने कबूला कि यह माल उसने अलीगढ़ के दवा कारोबारी से खरीदा था। इस पर आगरा, गाजियाबाद, अलीगढ़ और मथुरा की संयुक्त टीमों ने दवा कारोबारी, उसके बेटे और ड्राइवर से सघन पूछताछ की। करीब 12 घंटे कड़ी पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया गया है। टीम दस्तावेज कब्जे में लेकर मामले की जांच कर रही है।
आगरा में भारी मात्रा में ऐसी दवाएं बरामद की गईं जिन पर नामी कंपनी का लेबल लगा था। जब औषधि निरीक्षकों ने कंपनी और महाराष्ट्र (मुंबई) की मार्केटिंग फर्म से संपर्क किया, तो पता चला कि इन दवाओं का उनसे कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरी तरह से लोकल नेटवर्क था जो ब्रांडेड कंपनी के नाम का सहारा लेकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा था।
आगरा में आरोपी के खुलासे के बाद औषधि विभाग की चार टीमें अलीगढ़ पहुंचीं। आरोपी की फफाला मार्केट में थोक दुकान है और रामघाट रोड पर घर है। मंगलवार रात को एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत टीम ने मुख्य संदिग्ध उसके बेटे और ड्राइवर को हिरासत में लेकर थाना क्वार्सी बुलवाया। चारों जिलों के औषधि निरीक्षकों ने संदिग्धों से रात भर पूछताछ की। बुधवार सुबह तीनों को छोड़ दिया गया है, लेकिन विभाग उनके बयानों और साक्ष्यों का मिलान कर रहा है। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि नकली दवाओं की यह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट कहां स्थित है और इस सिंडिकेट में और कितने लोग शामिल हैं।
आगरा में मिली नकली दवाओं के तार अलीगढ़ से जुड़े हैं। आरोपी से पूछताछ की गई है। अभी मामले की जांच चल रही है। आगरा के औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा सहित अन्य मामले की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। – दीपक लोधी, औषधि निरीक्षक
चार दशक पुराना है कारोबार, विवादों में रहा
औषधि निरीक्षकों की टीम ने अलीगढ़ के जिस थोक दवा कारोबारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की उसका पूरा कारोबारी सफर विवादों में रहा है। कई साल पहले नगर निगम ने कारोबारी की दुकान को सील कर दिया। इससे पहले नामी दवा कंपनी ने अपनी बकायेदारी को लेकर कार्रवाई की थी। कई ब्रांडेड कंपनियों ने कारोबारी पर इसलिए कार्रवाई की कि उनके यहां की दवा का फर्जी लेबल लगाकर नकली दवा बेची जा रही थी।

