अरुणाचल प्रदेश में सुबह-सुबह भूकंप के झटके, 2.9 रही तीव्रता; तवांग से 92 किमी दूर था केंद्र

indianloveindia
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अरुणाचल प्रदेश में सुबह-सुबह भूकंप के झटके, 2.9 रही तीव्रता; तवांग से 92 किमी दूर था केंद्र

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में मंगलवार सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.9 रही। भूकंप सुबह 5 बजकर 44 मिनट 15 सेकंड पर आया।

NCS के अनुसार, भूकंप का केंद्र बिछोम (Bichom), अरुणाचल प्रदेश में था। इसका केंद्र जमीन के भीतर करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक भूकंप का केंद्र तवांग से करीब 92 किलोमीटर पूर्व में था।

NCS ने दर्ज किया भूकंप

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के रिकॉर्ड में इस भूकंप के निर्देशांक 27.540 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 92.817 डिग्री पूर्वी देशांतर दर्ज किए गए हैं। NCS ने इस घटना को ‘Reviewed’ के रूप में दर्ज किया है और इसे महसूस किए गए भूकंप के तौर पर सूचीबद्ध किया है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में भूकंप से किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है।

आसपास के इलाकों में भी महसूस होते हैं हल्के झटके

अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत भूकंपीय गतिविधियों वाले क्षेत्रों में आते हैं। ऐसे में कम तीव्रता के भूकंप भी कई बार स्थानीय स्तर पर महसूस किए जा सकते हैं।

मंगलवार सुबह का यह भूकंप अपेक्षाकृत कम तीव्रता का था। NCS के रिकॉर्ड के मुताबिक, इससे पहले भी बिछोम क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि दर्ज की गई है। 6 सितंबर को इसी क्षेत्र में 2.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसकी गहराई भी 10 किलोमीटर थी।

कैसे आते हैं भूकंप के झटके?

भूकंप धरती की सतह पर अचानक होने वाला कंपन है। इसका प्रमुख कारण पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों में होने वाली हलचल है। पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों में विभाजित है, जो लगातार धीमी गति से गति करती रहती हैं।

जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से दूर जाती हैं या उनके बीच फिसलन होती है, तो चट्टानों में तनाव जमा हो सकता है। तनाव अचानक रिलीज होने पर ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर निकलती है और धरती में कंपन महसूस होता है। इसी घटना को भूकंप कहा जाता है।

भूकंप की तीव्रता और उससे होने वाला प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। केवल रिक्टर स्केल की संख्या से किसी इलाके में होने वाले नुकसान का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं होता; भूकंप की गहराई, केंद्र से दूरी, स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियां और इमारतों की संरचना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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