बरेली: निगम खुद के 200 जर्जर दुकान-भवन नहीं गिरा पाया, निजी मकानों पर पहले लगा दिए लाल निशान

4 Min Read
बरेली: निगम खुद के 200 जर्जर दुकान-भवन नहीं गिरा पाया, निजी मकानों पर पहले लगा दिए लाल निशान

बरेली शहर में नगर निगम की करीब दो सौ दुकानें और कई भवन जर्जर हालत में हैं, लेकिन इन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। दूसरी ओर निगम ने शहर में निजी स्वामित्व वाले 172 जर्जर भवनों को चिह्नित कर उन पर लाल निशान लगा दिए हैं और भवन स्वामियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। यानी जिस तेजी से निगम दूसरों के जर्जर मकानों पर कार्रवाई कर रहा है, उतनी ही सुस्ती अपने भवनों को लेकर बरती जा रही है।

निगम की यह सक्रियता सात सितंबर को हुए हादसों के बाद बढ़ी है, जब एक सप्ताह पहले हुई रिकॉर्ड बारिश के चलते शहर के अलग-अलग इलाकों में तीन जर्जर भवन ढह गए थे। इन हादसों में किसी की जान तो नहीं गई, लेकिन तीन दोपहिया वाहनों समेत कीमती सामान मलबे में दब गया था। बता दें कि बारिश के मौसम में जर्जर भवनों के गिरने की समस्या बरेली में नई नहीं है—इससे पहले जुलाई में भी निगम ने 136 जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस जारी किए थे, जो अब बढ़कर 172 हो गए हैं।

पीडब्ल्यूडी ने पहले ही घोषित किया था कंडम

निगम की लापरवाही का सबसे स्पष्ट उदाहरण करीब 100 साल पुराना लाजपत बाजार है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इसे कंडम घोषित कर चुका है, फिर भी आज तक इसे गिराया नहीं गया—सिर्फ एक चेतावनी बोर्ड लगाकर औपचारिकता पूरी कर ली गई। यहां दुकानदार जबरन कब्जा किए बैठे हैं। यह बाजार साहू गोपीनाथ कन्या इंटर कॉलेज के ठीक सामने स्थित है, जहां हाल ही में रविवार को एनडीए परीक्षा का केंद्र भी बनाया गया था और सैकड़ों अभ्यर्थियों के अभिभावक परीक्षा के दौरान इन्हीं जर्जर दुकानों के बरामदे में बैठे देखे गए।

इसके अलावा साहू रामस्वरूप महिला महाविद्यालय, चंद्रवती प्राथमिक स्कूल, राम गोपाल पाठशाला जूनियर हाईस्कूल और सावित्री देवी शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राएं रोजाना इसी बाजार से होकर गुजरते हैं, जिससे खतरा सिर्फ खरीदारों तक सीमित नहीं, बल्कि हजारों छात्रों तक फैला हुआ है। लाजपत बाजार की दुकानों का किराया निगम को बेहद मामूली मिलता है, जबकि आसपास की निजी दुकानों का किराया सात से आठ हजार रुपये तक है।

शास्त्रीनगर बाजार और अन्य निगम भवनों का भी बुरा हाल

कुतुबखाना के पास स्थित शास्त्रीनगर बाजार की स्थिति भी अलग नहीं है। यहां 150 दुकानें हैं, जिन्हें निगम पहले ही जर्जर घोषित कर चुका है, लेकिन व्यापारी दुकानें खाली करने को तैयार नहीं हैं। इसके अलावा पन्नी लाल कोठी स्थित निगम भवन में आयुर्वेदिक अस्पताल चल रहा है, जो कभी भी गिर सकता है। हिंद टाकीज के पीछे स्थित निगम की दुकानें और जैन मंदिर के पीछे कर्मचारियों के लिए बना आवास भी जर्जर हो चुका है।

पार्षद और निगम आयुक्त की प्रतिक्रिया

सिकलापुर के पार्षद जयप्रकाश राजपूत ने कहा कि जिस तरह निगम आम लोगों के घरों को गिराने के लिए नोटिस चस्पा कर रहा है, उसी तरह अपनी जर्जर दुकानों और भवनों को भी गिरा दे तो बड़े हादसों की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि लाजपत बाजार और शास्त्रीनगर बाजार जर्जर हो चुके हैं और इन्हें जल्द गिराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि निगम की अन्य जर्जर दुकानों को चिह्नित कर जेसीबी से गिराने की तैयारी है। पन्नी लाल कोठी और जैन मंदिर के पीछे स्थित आवास को कंडम घोषित कराने के लिए पीडब्ल्यूडी से जांच कराई जा रही है।

फिलहाल निगम के भवनों को गिराने की कोई निश्चित समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है, जबकि निजी भवन स्वामियों को नोटिस के जरिये तेजी से कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

Share This Article
Exit mobile version