यूपी: परिषदीय स्कूलों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक, बच्चों को सिखाया जाएगा वैज्ञानिक कूड़ा निस्तारण

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यूपी: परिषदीय स्कूलों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक, बच्चों को सिखाया जाएगा वैज्ञानिक कूड़ा निस्तारण

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में अब सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए स्कूलों में विशेष स्वच्छता पखवाड़ा और स्वच्छता अभियान चलाने का निर्देश जारी किया है, जिसके तहत बच्चों को गीले-सूखे कूड़े, ई-कचरे और कूड़ा निस्तारण की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी जाएगी।

विभाग के कार्यक्रम के अनुसार, 15 से 30 सितंबर तक स्कूलों में स्वच्छता पखवाड़ा मनाया जाएगा, जबकि 1 से 31 अक्तूबर तक विशेष स्वच्छता अभियान चलेगा। इसी अवधि में 2 अक्तूबर को स्वच्छ भारत दिवस का आयोजन भी किया जाएगा। स्वच्छता पखवाड़े के दौरान विद्यालयों में निबंध, स्लोगन, पेंटिंग और मॉडल बनाने जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी, जिनमें विजेता छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकों और अभिभावकों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

रीयूज, रिड्यूज, रिसाइकिल पर जोर

अभियान के तहत बच्चों और उनके परिवारों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ रीयूज, रिड्यूज और रिसाइक्लिंग के सिद्धांत अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसका मकसद सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाकर प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना है।

ई-कचरा संग्रहण केंद्र बनाने का निर्देश

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को निर्देश दिया है कि विद्यालयों में ई-कचरा संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएं और इससे जुड़ी जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएं। निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बच्चे खुद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या क्षतिग्रस्त बैटरी को न खोलें, इसका विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि ऐसा करना सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है।

क्रियान्वयन चरण अक्तूबर में

2 से 31 अक्तूबर के बीच कूड़ा निस्तारण के क्रियान्वयन चरण का आयोजन होगा, जिसमें स्कूलों में सीखी गई बातों को व्यावहारिक रूप से लागू कराया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे अभियान से न सिर्फ बच्चों बल्कि उनके अभिभावकों को भी जोड़ा जाए, ताकि स्वच्छता और कचरा प्रबंधन का संदेश घर-घर तक पहुंच सके।

शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का मानना है कि बचपन से ही कूड़ा प्रबंधन और प्लास्टिक के विकल्पों की आदत डालने से आने वाली पीढ़ी पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बन सकेगी। हालांकि, इस निर्देश के जमीनी क्रियान्वयन और स्कूलों में इसके लिए जरूरी संसाधनों की उपलब्धता को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

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