कैप्टन अमरिंदर के बदले तेवरों से पंजाब में अटकलें तेज, क्या कांग्रेस से फिर बढ़ रही नजदीकी?

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कैप्टन अमरिंदर के बदले तेवरों से पंजाब में अटकलें तेज, क्या कांग्रेस से फिर बढ़ रही नजदीकी?

पंजाब की राजनीति में कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर सवाल उठाने और इससे पहले राहुल गांधी की ओर से उनकी खुलकर तारीफ किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बीजेपी के वरिष्ठ नेता की कांग्रेस से फिर नजदीकी बढ़ रही है। हालांकि, उपलब्ध बयानों के आधार पर फिलहाल कांग्रेस में उनकी वापसी का कोई स्पष्ट संकेत नहीं है।

दरअसल, 3 सितंबर को प्रकाशित अपने एक लेख में अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले माओवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई और सरकार की आलोचना करने वाले नागरिकों या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक असहमति को नक्सलवाद के बराबर नहीं रखा जाना चाहिए।

‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर कैप्टन ने उठाए सवाल

अमरिंदर सिंह ने अपने लेख में प्रधानमंत्री से ‘दिमागी नक्सल’ की स्पष्ट परिभाषा बताने की मांग की। उनका सवाल था कि इस श्रेणी में आने वाले लोगों और लोकतांत्रिक तरीके से असहमति जताने वाले नागरिकों के बीच सीमा कैसे तय की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति का संबंध माओवादी हिंसा, उसके लिए समर्थन या ऐसी गतिविधियों को मदद पहुंचाने से है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन सरकार की नीतियों की आलोचना या शांतिपूर्ण विरोध को उसी श्रेणी में रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त के लाल किले से दिए संबोधन में सशस्त्र नक्सलवाद के कमजोर होने का जिक्र करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की बात कही थी। इसके बाद विपक्षी नेताओं की ओर से इस शब्द को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बाद में स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री का निशाना विपक्षी नेताओं पर नहीं, बल्कि माओवाद और अलगाववाद का समर्थन करने वालों पर था।

राहुल गांधी ने बताया था अपना ‘फेवरेट बीजेपी नेता’

अमरिंदर सिंह को लेकर मौजूदा राजनीतिक चर्चा की दूसरी वजह राहुल गांधी का 6 अगस्त का बयान है। इंस्टाग्राम पर ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र के दौरान जब राहुल गांधी से बीजेपी के उनके पसंदीदा नेता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया।

राहुल गांधी ने कहा कि उनकी कैप्टन अमरिंदर से अच्छी बनती है, वह ‘कूल’ हैं और सैन्य इतिहास के विशेषज्ञ हैं। जवाब के अंत में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “Hello, Uncle Amarinder.” कांग्रेस ने भी राहुल गांधी के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था।

लेकिन कैप्टन ने कांग्रेस में लौटने की बात नकार दी थी

राहुल गांधी की तारीफ के बाद अमरिंदर सिंह ने अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर स्पष्ट बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के साथ उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंध बने रहेंगे, लेकिन राजनीतिक रूप से वह बीजेपी के साथ प्रतिबद्ध हैं।

यह तथ्य मौजूदा ‘कांग्रेस में घरवापसी’ की अटकल को काफी हद तक सीमित करता है। अमरिंदर सिंह 2021 में कांग्रेस छोड़ने के बाद पंजाब लोक कांग्रेस का गठन कर चुके थे और बाद में 2022 में अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया था।

फिर क्यों उठ रही है घरवापसी की चर्चा?

अमरिंदर सिंह का ताजा बयान इसलिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह बीजेपी के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद प्रधानमंत्री के एक प्रमुख राजनीतिक नैरेटिव में इस्तेमाल हुए शब्द की परिभाषा और सीमा पर सवाल उठा रहे हैं। इसके कुछ सप्ताह पहले राहुल गांधी का उन्हें अपना पसंदीदा बीजेपी नेता बताना भी चर्चा का विषय बना था।

इन दोनों घटनाओं को जोड़कर पंजाब की राजनीति में अटकलें लगना स्वाभाविक है, खासकर विधानसभा चुनाव से पहले। हालांकि, इन घटनाओं को कांग्रेस में वापसी की तैयारी का प्रमाण मानना फिलहाल जल्दबाजी होगी। अमरिंदर सिंह का अपना सार्वजनिक रुख अभी भी यही है कि उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता बीजेपी के साथ है।

इसलिए फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के बीच व्यक्तिगत रिश्तों तथा राजनीतिक संवाद को लेकर चर्चा जरूर बढ़ी है, लेकिन कांग्रेस में उनकी वापसी को लेकर कोई पुष्ट घोषणा या स्पष्ट राजनीतिक संकेत सामने नहीं आया है।

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