प्रदर्शनकारियों पर हिंसा के आरोपों पर दिल्ली HC सख्त, केंद्र-पुलिस को भेजा नोटिस, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

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दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेरहम हिंसा के इस्तेमाल के मामलों पर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने CCTV, बॉडी कैम फुटेज और दूसरे रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।

कैसे कह सकते अलग-अलग दर्ज हो FIR?

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत सरकार के कानूनी अधिकारी अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) राजू से पूछा, ‘आप कैसे कह सकते हैं कि यह पब्लिसिटी पाने के लिए दायर की गई याचिका है? जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला मौजूद है और इतनी बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं, तो आप कैसे कह सकते हैं कि लोगों को अलग-अलग FIR दर्ज करानी चाहिए?’

शांतिपूर्ण नहीं था विरोध प्रदर्शन

सरकार ने हाईकोर्ट से कहा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने हिंसा का सहारा लिया था। ये याचिकाएं पब्लिसिटी पाने के लिए दायर की गई हैं।’ ASG ने हाई कोर्ट से कहा, ‘जिन लोगों के साथ मारपीट का आरोप है। उन्होंने कोई FIR या याचिका दायर नहीं की है।’

11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस का चार हफ्ते में जवाब मांगा है। इसके बाद हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा को लेकर मामला

बता दें कि 20 जुलाई को जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा और लाठीचार्ज का मामला है। मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस दोनों को नोटिस भेजा है।

हिंसक हो गया था ये प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से 20 जुलाई को संसद मार्च आयोजित किया गया था। इस मार्च में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर, संसद भवन और कनॉट प्लेस के पास इकट्ठा हुए थे। तभी ये प्रदर्शन हिंसक हो गया था। संसद मार्ग के पास कई स्तर की बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका गया था। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े थे। इस घटना के कई सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं।

 

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