युवाओं के शरीर में चुपचाप घर कर रही हैं BP-शुगर जैसी बीमारियां! लक्षण आने तक हो सकता है बड़ा नुकसान

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बिना लक्षणों के चुपके से पनप रही हैं युवाओं में ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारी

नई दिल्ली। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को अक्सर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियां माना जाता है, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। कम उम्र के लोगों में भी हाई BP, बढ़ी हुई ब्लड शुगर, मोटापा और इससे जुड़े मेटाबॉलिक जोखिम देखने को मिल रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि शुरुआत में इन स्थितियों के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।

यही वजह है कि व्यक्ति खुद को बिल्कुल स्वस्थ समझता रहता है, जबकि अंदर ही अंदर बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर दिल, किडनी, आंखों, दिमाग और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। WHO के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर वाले बहुत से लोगों को इसका पता ही नहीं होता, क्योंकि आमतौर पर इसके लक्षण महसूस नहीं होते।

भारत में डायबिटीज की स्थिति भी चिंताजनक

WHO India के अनुसार, भारत में 18 वर्ष से अधिक उम्र के अनुमानित 7.7 करोड़ लोग टाइप-2 डायबिटीज से प्रभावित हैं और करीब 2.5 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज की स्थिति में हैं। संगठन के मुताबिक, डायबिटीज से पीड़ित आधे से अधिक लोगों को अपनी स्थिति की जानकारी नहीं है।

इसका मतलब साफ है—सिर्फ लक्षणों के आधार पर डायबिटीज या हाई BP को पहचानना मुश्किल हो सकता है।

हाई BP को ‘साइलेंट किलर’ क्यों कहा जाता है?

हाई ब्लड प्रेशर की सबसे खतरनाक बात यही है कि ज्यादातर लोगों को इसका एहसास तक नहीं होता। WHO के अनुसार, हाई BP की पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका ब्लड प्रेशर की जांच है।

लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर हाई BP दिल और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ाता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक तथा किडनी की बीमारी का जोखिम बढ़ा सकता है।

यानी सिरदर्द या चक्कर आने का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है—BP बढ़ा हुआ है या नहीं, यह मशीन से जांच करने पर ही पता चलेगा।

डायबिटीज भी कई साल तक ‘चुप’ रह सकती है

टाइप-2 डायबिटीज के लक्षण कई बार इतने हल्के होते हैं कि व्यक्ति उन्हें सामान्य थकान या रोजमर्रा की परेशानी समझ लेता है। WHO के मुताबिक, टाइप-2 डायबिटीज के लक्षण कई वर्षों तक हल्के रह सकते हैं और बीमारी का पता तब चलता है जब शरीर में जटिलताएं विकसित होने लगती हैं।

बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, धुंधला दिखाई देना या बिना कोशिश वजन कम होना इसके संभावित लक्षण हो सकते हैं, लेकिन लक्षण न होना डायबिटीज न होने की गारंटी नहीं है।

युवाओं में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

बदलती जीवनशैली इसका एक महत्वपूर्ण कारण है। लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित भोजन, ज्यादा नमक-चीनी और कैलोरी का सेवन, बढ़ता वजन, धूम्रपान और शराब जैसे कारक हाई BP और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा परिवार में डायबिटीज या हाई BP का इतिहास भी जोखिम बढ़ा सकता है।

आज की नौकरी और पढ़ाई की दिनचर्या में घंटों बैठकर काम करना, बाहर का खाना और अनियमित नींद जैसी आदतें भी समस्या को बढ़ा सकती हैं।

बीमारी अंदर से किन अंगों को नुकसान पहुंचाती है?

लंबे समय तक अनियंत्रित हाई BP और डायबिटीज शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकते हैं।

दिल: हार्ट अटैक और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
दिमाग: स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
किडनी: लंबे समय में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
आंखें: डायबिटीज आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर दृष्टि पर असर डाल सकती है।
नसें: लंबे समय तक बढ़ी हुई ब्लड शुगर से नसों को नुकसान हो सकता है।

यही वजह है कि इन बीमारियों को सिर्फ ‘शुगर’ या ‘बीपी’ तक सीमित समस्या समझना ठीक नहीं है।

किन लोगों को जांच को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?

खास तौर पर उन लोगों को डॉक्टर से नियमित जांच के बारे में बात करनी चाहिए जिनमें इनमें से कोई जोखिम मौजूद हो:

  • परिवार में डायबिटीज या हाई BP का इतिहास
  • अधिक वजन या मोटापा
  • शारीरिक गतिविधि बहुत कम होना
  • अस्वास्थ्यकर खान-पान
  • धूम्रपान या शराब का सेवन
  • पहले से ब्लड शुगर या BP बढ़ा हुआ आना
  • अन्य स्वास्थ्य जोखिम, जिनके बारे में डॉक्टर ने जांच की सलाह दी हो

सिर्फ उम्र 30 साल होने का इंतजार करना जरूरी नहीं है। आपकी व्यक्तिगत जोखिम स्थिति के आधार पर डॉक्टर इससे पहले भी जांच की सलाह दे सकते हैं।

कौन-कौन सी जांच काम आती है?

हाई BP के लिए सबसे पहली और आसान जांच ब्लड प्रेशर मापना है।

डायबिटीज के लिए डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसी जांचों की सलाह दे सकते हैं। केवल एक घरेलू रीडिंग देखकर खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

भारत में भी हाई BP और डायबिटीज जैसी गैर-संचारी बीमारियों के लिए स्क्रीनिंग और शुरुआती पहचान पर जोर दिया जाता रहा है।

बचाव के लिए क्या करें?

पूरी तरह जोखिम खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज और हाई BP के जोखिम को कम करने में जीवनशैली की महत्वपूर्ण भूमिका है।

✔ नियमित शारीरिक गतिविधि करें
✔ वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करें
✔ फल, सब्जियां और संतुलित आहार को प्राथमिकता दें
✔ ज्यादा नमक, चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन सीमित करें
✔ धूम्रपान से बचें
✔ शराब का सेवन न करें या सीमित करें
✔ पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन पर ध्यान दें
✔ समय-समय पर BP और ब्लड शुगर की जांच कराएं

WHO भी स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन और तंबाकू से बचने को डायबिटीज के जोखिम को रोकने या देर से विकसित होने में मददगार मानता है।

सबसे जरूरी बात

हाई BP और डायबिटीज का खतरा सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज और हाई BP लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकते हैं। इसलिए ‘मुझे तो कोई परेशानी नहीं है’ को अपनी सेहत का प्रमाण मानना ठीक नहीं है।

अगर आपकी उम्र, वजन, पारिवारिक इतिहास या जीवनशैली के कारण जोखिम है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर समय पर स्क्रीनिंग कराना बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ने का सबसे बेहतर तरीका है।

डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी का निदान या इलाज केवल इस लेख के आधार पर न करें। अपनी व्यक्तिगत स्थिति और जांच की जरूरत के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

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