मौसम बदलाव से वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जुकाम-खांसी, गले में दर्द और खराश के साथ तेज बुखार आ रहा है। घर में एक को वायरल फीवर होने पर 3-5 दिन में पूरा परिवार चपेट में आ जाता है। एसएन मेडिकल कॉलेज में एक ही परिवार के कई सदस्य इलाज कराने के लिए आ रहे हैं।
मेडिसिन विभाग के डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि बारिश होने से पारा कम हो रहा है फिर तेज धूप होने से गर्मी बढ़ जाती है। इस मौसम में कई बार लोग ठंडी सामग्री खा-पी लेते हैं। इस बदलाव से वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसमें गले में खराश, दर्द, सूजन, सिर में दर्द, छाती में जकड़न और बुखार की परेशानी हो रही है। ये संक्रामक है और इसके संपर्क में आने वाले लोग भी चपेट में आ रहे हैं।
ओपीडी में एक ही घर के दो-तीन मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। राहत की बात है कि वायरल फीवर के मरीज 5-7 दिन में ठीक हो रहे हैं। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल चतुर्वेदी ने बताया कि ओपीडी में 60-70 फीसदी बच्चे वायरल फीवर के मिल रहे हैं। पेट में भी दर्द हो रहा है। इससे बच्चों की नींद भी प्रभावित हो रही है, जिससे वह चिड़चिड़े भी हो रहे हैं। दवा देने के साथ बच्चों के परिजन को जागरूक भी कर रहे हैं।
इन बातों का रखें ध्यान:
वायरल फीवर के मरीज परिजन से दूरी बरतें।
खांसते-छींकते समय मुंह पर रुमाल रखें।
भोजन से पहले हाथों को साबुन से साफ करें।
बच्चों को ठंडी सामग्री खिलाने-पिलाने से बचाएं।
बच्चों को बाहर का भोजन और फास्टफूड खिलाने से बचाएं।
बुखार आने पर बच्चों को स्कूल न भेजें, मच्छरों से भी बचाएं।
दस्तक अभियान में मिले 650 वायरल के मरीज
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया की दस्तक अभियान 10 जुलाई से शुरू हुआ है। इसमें टीम घर-घर जाकर सफाई के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं। डेंगू-मलेरिया से बचाव के बारे में भी बताया जा रहा है। अब तक करीब 650 लोग वायरल फीवर के मिले, इनको दवा भी दी गई। डेंगू-मलेरिया के लक्षण प्रतीत होने पर जांच भी कराई है। 30 तक दस्तक अभियान चलेगा। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि इस साल डेंगू के 9 और मलेरिया के 10 मरीज मिल चुके हैं। यह पूरी तरह ठीक हो चुकी है।

